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सहारनपुर में राधा स्वामी भवन में तीन दिन का सत्संग:31 अगस्त से 3 सितंबर तक डायवर्जन, 32 ट्रेनों का सरसावा में ठहराव
सहारनपुर के पिलखनी स्थित राधा स्वामी सत्संग भवन में 1 और 2 सितंबर को प्रस्तावित दो दिवसीय सत्संग कार्यक्रम को देखते हुए जिले में यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों को देखते हुए पुलिस ने करीब तीन दिनों के लिए रूट डायवर्जन लागू करने का निर्णय लिया है। ट्रैफिक डायवर्जन 31 अगस्त की रात 8 बजे से शुरू होकर 3 सितंबर की रात 10 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान सामान्य वाहनों को निर्धारित वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाएगा। हालांकि, सत्संग में शामिल होने के लिए पिलखनी जाने वाले वाहनों को डायवर्जन से छूट दी गई है। दोपहिया वाहनों के लिए भी कुछ मार्गों पर अलग व्यवस्था रखी गई है। सत्संग में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में अनुयायियों के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने यातायात को सुचारु रखने के लिए पहले से व्यवस्था तैयार की है। इन रास्तों पर बदलेगा ट्रैफिक 32 ट्रेनों का सरसावा स्टेशन पर रहेगा ठहराव सत्संग में दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रेलवे की ओर से भी अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। 31 अगस्त से 2 सितंबर तक सरसावा रेलवे स्टेशन पर 32 ट्रेनों का ठहराव रखा गया है। इनमें छत्तीसगढ़ समेत कई प्रमुख ट्रेनें शामिल हैं। इससे रेल मार्ग से कार्यक्रम में पहुंचने वाले अनुयायियों को सहूलियत मिलेगी। कार्यक्रम को लेकर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी लगातार व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस की अपील- सफर से पहले रूट जरूर देख लें एसपी ट्रैफिक शैलेंद्र कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, डायवर्जन का उद्देश्य सत्संग के दौरान यातायात को व्यवस्थित रखना और आम वाहन चालकों को जाम की स्थिति से बचाना है। निर्धारित अवधि में सामान्य वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से ही संचालित किया जाएगा। ऐसे में 31 अगस्त की रात से 3 सितंबर रात तक सहारनपुर, सरसावा और आसपास के क्षेत्रों से होकर गुजरने वाले वाहन चालक सफर शुरू करने से पहले अपना रूट तय कर लें। खासकर यमुनानगर, अंबाला, देहरादून, हरिद्वार, मुजफ्फरनगर, मेरठ, देवबंद, शामली और सरसावा की ओर जाने वाले वाहन चालकों को डायवर्जन व्यवस्था का ध्यान रखना होगा।
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