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शिवसेना विवाद: सुप्रीम कोर्ट में शिंदे गुट ने उद्धव ठाकरे के दावों को बताया गलत, 15 सितंबर को अगली सुनवाई

📰 Newsprahari 🕐 1 min read 📅 September 2, 2026 👁 5 views
शिवसेना विवाद: सुप्रीम कोर्ट में शिंदे गुट ने उद्धव ठाकरे के दावों को बताया गलत, 15 सितंबर को अगली सुनवाई
शिवसेना विवाद: सुप्रीम कोर्ट में शिंदे गुट ने उद्धव ठाकरे के दावों को बताया गलत, 15 सितंबर को अगली सुनवाई वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल ने दलीलों के लिए मांगा कम से कम चार घंटे का समय, चुनाव आयोग के फैसले को उद्धव गुट ने दी है चुनौती नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। एकनाथ शिंदे गुट ने उद्धव ठाकरे गुट की ओर से किए गए दावों को गलत और भ्रामक बताया। शिंदे गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने अपनी दलीलें रखीं और मामले में अपनी बात पूरी तरह रखने के लिए कम से कम चार घंटे का समय मांगा। अब मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को दोपहर दो बजे होगी। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ कर रही है। यह विवाद शिवसेना के नाम और ‘तीर-कमान’ चुनाव निशान पर अधिकार से जुड़ा है। चुनाव आयोग के फैसले को दी गई है चुनौती चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को वास्तविक शिवसेना के रूप में मान्यता देते हुए पार्टी का ‘तीर-कमान’ चुनाव निशान आवंटित किया था। उद्धव ठाकरे गुट ने आयोग के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। बुधवार की सुनवाई में शिंदे गुट की ओर से नीरज किशन कौल ने उद्धव गुट की दलीलों पर सवाल उठाए। उन्होंने पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र और संगठनात्मक चुनावों से जुड़े मुद्दे को भी अदालत के सामने रखा। आंतरिक चुनावों को लेकर शिंदे गुट की दलील कौल ने दलील दी कि किसी राजनीतिक दल में आंतरिक चुनावों को केवल इस आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता कि चुनाव में धन का लेन-देन हो सकता है। उनका कहना था कि यदि चुनाव में किसी तरह की धांधली या गड़बड़ी है तो उसका समाधान उसे सुधारना होना चाहिए, न कि चुनावी प्रक्रिया को ही समाप्त कर देना। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के संपर्क में रहने वाले पदाधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे लोग जनता और मतदाताओं की नब्ज समझते हैं तथा पार्टी को फीडबैक देते हैं, जो उसकी नीतियों और घोषणापत्र को प्रभावित कर सकता है। चुनाव आयोग की भूमिका पर भी रखी बात शिंदे गुट ने कहा कि निर्वाचन आयोग किसी राजनीतिक दल की रोजमर्रा की गतिविधियों पर हर समय नजर नहीं रख सकता, लेकिन जब उसके संज्ञान में कोई मामला आता है तो वह उस पर कार्रवाई करने से पीछे भी नहीं हट सकता। कौल ने जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 39 का उल्लेख करते हुए कहा कि अधिकतर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल अपने संविधान के अनुसार आंतरिक लोकतंत्र बनाए रखते हैं। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों को अपने संविधान का रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था और शिवसेना ने वर्ष 1999 में अपना संविधान आयोग को दिया था। ‘पक्ष प्रमुख’ के पद को लेकर भी उठाया सवाल शिंदे गुट की ओर से यह भी कहा गया कि उद्धव ठाकरे गुट का यह तर्क तथ्यात्मक रूप से गलत है कि ‘पक्ष प्रमुख’ का पद केवल वर्ष 2018 के संविधान के तहत अस्तित्व में आया था। कौल के अनुसार, बालासाहेब ठाकरे के निधन के बाद पार्टी के संवैधानिक ढांचे में बदलाव हुआ था। दलील में कहा गया कि शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के सम्मान में वर्ष 2013 में ‘शिवसेना प्रमुख’ के पद को फ्रीज किया गया था और इसके बाद ‘पक्ष प्रमुख’ का पद बनाया गया। शिंदे गुट ने ठाकरे गुट की कई दलीलों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया। चार घंटे का समय मांगा नीरज किशन कौल ने कहा कि मामले की सुनवाई को करीब दस दिन हो चुके हैं और उन्हें अपनी दलीलें पूरी करने के लिए कम से कम चार घंटे चाहिए। उन्होंने कहा कि इसमें करीब दो घंटे केवल अयोग्यता से जुड़े मामले पर दलीलें रखने में लगेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को दोपहर दो बजे निर्धारित की है। अब दोनों गुटों की दलीलों के बीच इस विवाद में अदालत की आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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