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सहरसा में अतिक्रमण हटाने में भेदभाव का आरोप:महादलितों ने DM से मांगी मदद, सरकारी जमीन पर चयन के साथ कार्रवाई
सहरसा के महिषी अंचल अंतर्गत लहुआर गांव में अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। गांव के दर्जनों महादलित परिवारों ने अंचलाधिकारी (सीओ) पर कार्रवाई के दौरान पक्षपात और भेदभाव बरतने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ितों ने गुरुवार को जिलाधिकारी से आवेदन देकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और सरकारी व धार्मिक न्यास की भूमि को निष्पक्ष रूप से अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है। जिलाधिकारी को दिए गए आवेदन में लहुआर निवासी नथन राम, बेचनी देवी सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि खाता संख्या 289 के तहत विभिन्न खेसरा नंबरों की भूमि 'बिहार सरकार' के नाम से दर्ज है। कथित अतिक्रमणकारियों को छोड़ने का आरोप इसके अतिरिक्त, खाता संख्या 235, खेसरा संख्या 188 में स्थित 16 डिसमिल जमीन 'राधाकृष्ण ठाकुरबाड़ी' (धार्मिक न्यास) के नाम पर है। ग्रामीणों का आरोप है कि इन बेशकीमती सरकारी और धार्मिक जमीनों पर कुछ प्रभावशाली लोगों ने अवैध रूप से पक्के मकान और अन्य निर्माण कर निजी उपयोग किया है। पीड़ितों का कहना है कि प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के नाम पर केवल उनके घरों पर बुलडोजर चलाया, जबकि उसी भूखंड पर काबिज अन्य कथित अतिक्रमणकारियों को छोड़ दिया गया। ग्रामीणों ने इसे एकतरफा और भेदभावपूर्ण कार्रवाई बताया है। पंचायत समिति सदस्य और पीड़ित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि पूरे रकबे की दोबारा नापी कराकर निष्पक्ष जांच की जाए। आरोपों को पूरी तरह झूठा बताया उन्होंने मांग की है कि सभी अवैध कब्जों को समान रूप से हटाया जाए और बेघर हुए गरीब परिवारों को उचित राहत एवं पुनर्वास प्रदान किया जाए। इस संबंध में महिषी के अंचलाधिकारी संजय कुमार ने कहा है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नियमानुसार की गई है। उन्होंने पक्षपात के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि लोग अक्सर इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाते रहते हैं।
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