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तेजाब की रिटेल बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र-राज्यों से मांगी रिपोर्ट

📰 Abp News 🕐 1 min read 📅 August 31, 2026 👁 2 views
तेजाब की रिटेल बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र-राज्यों से मांगी रिपोर्ट

बाजार में खुलेआम तेजाब की बिक्री और एसिड अटैक की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या तेजाब की खुदरा बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकती है. कोर्ट ने कहा है कि अगर पूर्ण प्रतिबंध संभव नहीं है तो इसकी बिक्री को बेहद सख्त नियमों के दायरे में लाने पर विचार किया जाए.

एसिड अटैक पीड़िता शाहीन मलिक की याचिका पर सुनते हुए कोर्ट ने कहा कि तेजाब की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए 2013 में बनाए गए दिशा-निर्देश अब पुराने पड़ चुके हैं. उनका जमीन पर सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूरे देश में तेजाब की खुदरा बिक्री को नियंत्रित करने के लिए एक मॉडल स्कीम तैयार करने पर विचार करने को कहा है.

राज्य सरकारों से 6 सप्ताह में मांगी रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को 6 सप्ताह में रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है. राज्यों को बताना होगा कि उनके यहां तेजाब की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए क्या नियम लागू हैं और एसिड अटैक पीड़ितों के इलाज, मुआवजे और पुनर्वास के लिए क्या व्यवस्था की गई है. जिन राज्यों ने अब तक बिक्री को नियंत्रित करने के लिए नियम नहीं बनाए हैं, उन्हें आवश्यक नियम बनाने को कहा गया है.

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पीड़ितों के मुफ्त इलाज-मुआवजे पर जोर

एसिड अटैक पीड़ितों के मुफ्त इलाज, उचित मुआवजे और पुनर्वास पर भी आदेश में जोर दिया गया है. राज्यों से कहा गया है कि पीड़ितों को रोजगार देने की संभावनाओं पर विचार किया जाए. जब तक रोजगार या स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था नहीं होती, तब तक उनके जीवन-निर्वाह के लिए भत्ते की योजना बनाने पर भी विचार किया जाए.

SC ने स्कूल-कॉलेजों से मांगें सुझाव

एसिड अटैक से जुड़े मुकदमों की तेज सुनवाई को जरूरी बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट को निर्देश दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से कहा है कि उन्हें ट्रायल कोर्ट में लंबित ऐसे मामलों की सुनवाई पूरी करने की समय-सीमा तय करने पर विचार करना चाहिए. कोर्ट ने स्कूल और कॉलेजों में एसिड अटैक से बचाव, हमले के बाद फर्स्ट एड और आपात स्थिति में उठाए जाने वाले कदमों को लेकर भी सुझाव मांगे हैं. कोर्ट ने मामले के पक्षकारों और सुनवाई से जुड़े एनजीओ से 4 सप्ताह में इस बारे में सुझाव देने को कहा है.

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