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टिम्बर मार्केट में राज्य स्तरीय उड़न दस्ते की दबिश:लकड़ी के एक वाहन में टीपी नहीं, दूसरे की फर्जी निकली; आरा मशीन सील
धार रोड स्थित जीएनटी टिम्बर मार्केट में शुक्रवार को राज्य स्तरीय उड़न दस्ते ने शुक्रवार को दबिश दी। टीम एक दिन पहले रात से ही शहर में सक्रिय थी। कार्रवाई के दौरान बबूल की लकड़ी से भरे दो वाहन पकड़े गए। जांच में एक वाहन के पास लकड़ी परिवहन की टीपी नहीं मिली, जबकि दूसरे वाहन की टीपी जांच में फर्जी पाई गई। टीम ने दोनों वाहनों को जब्त कर वन विभाग के नवरत्न बाग स्थित कार्यालय भेज दिया। इसके अलावा उड़न दस्ते ने टिम्बर मार्केट की जालाराम इंटरप्राइजेस की आरा मशीन की भी जांच की। करीब दो घंटे तक दस्तावेज और रिकॉर्ड खंगालने के बाद मशीन को सील कर दिया गया। गौरतलब है कि इंदौर के वन विभाग के अधिकारियों को शहर में हो रही अनियमितता के जानकारी तक नहीं थी। महाराष्ट्र की टीपी स्कैन कर बनाई धार रोड की ओर से आ रहे दोनों वाहनों को टीम ने रोककर दस्तावेजों की जांच की। दोनों में बबूल की लकड़ी भरी थी। एक वाहन चालक परिवहन टीपी पेश नहीं कर सका। दूसरे वाहन में महाराष्ट्र के जलगांव की टीपी दिखाई गई, लेकिन दस्तावेज की जांच के दौरान टीम ने उसे स्कैन कर तैयार की गई फर्जी टीपी बताया। महाराष्ट्र,तेलंगाना, गुजरात, राजस्थान ,यूपी की टीपी, एमपी के जंगलों की लकड़ी जानकारी अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आया कि महाराष्ट्र, गुजरात , तेलंगाना, गुजरात, राजस्थान,यूपी की परिवहन अनुज्ञापत्र (टीपी) के जरिए मध्यप्रदेश के जंगलों से काटी गई लकड़ी के परिवहन की आशंका है। एक टीपी पर कई वाहनों से लकड़ी लाने की शिकायत इंदौर की लकड़ी मंडी में अलग-अलग राज्यों की टीपी के जरिए मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से लकड़ी पहुंचने को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं। एक ही टीपी पर अलग-अलग वाहनों से लकड़ी पहुंचाई जा रही है। महाराष्ट्र के साथ तेलंगाना, राजस्थान,उत्तर प्रदेश और गुजरात की टीपी से लकड़ी आने की शिकायतों की भी जांच की जा रही है। स्थानीय अमले को दूर रखा, उज्जैन-देवास की टीम साथ आई इस कार्रवाई की सबसे खास बात यह रही कि स्थानीय वन अमले को इसकी जानकारी पहले से नहीं दी गई थी। राज्य स्तरीय टीम ने कार्रवाई के लिए उज्जैन और देवास के वन कर्मचारियों को अपने साथ लिया था। जानकारी अनुसार लंबे समय से टिम्बर मार्केट में फर्जी टीपी और अवैध लकड़ी परिवहन की शिकायतें मिल रही थीं। स्थानीय स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद मामला राज्य स्तर तक पहुंचा और उड़न दस्ते ने सीधे कार्रवाई की।
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