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उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी:तीन याचिकाओं में किसानों ने लगाया था नियमों की अनदेखी का आरोप
सिंहस्थ 2028 के मद्देनजर बनाए जा रहे उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण को लेकर दायर तीन याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई। मंगलवार को करीब 20 मिनट चली बहस के बाद न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। एक तरफ न्यायालय में मामला विचाराधीन है, वहीं दूसरी ओर प्रोजेक्ट के तहत कुछ क्षेत्रों में सड़क निर्माण का काम शुरू कर दिया गया है। अधिग्रहण में नियमों का पालन नहीं किसानों की ओर से पैरवी करते हुए एडवोकेट विशाल चौहान ने न्यायालय को बताया कि उज्जैन जिले के सोडंग सहित अन्य गांवों में जमीन अधिग्रहण के दौरान नियमों का पालन नहीं किया गया। नियमानुसार दावे-आपत्तियों की सुनवाई कलेक्टर को करनी थी, लेकिन यह सुनवाई एसडीओ ने की और आदेश कलेक्टर ने जारी कर दिए। याचिका में इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताया गया। किसानों ने आपत्ति दर्ज कराई थी कि प्रस्तावित अधिग्रहण स्थल के पास ही एक सरकारी सड़क पहले से मौजूद है। यदि सड़क का थोड़ा अलाइनमेंट बदला जाए, तो किसानों की जमीन अधिग्रहित करने की आवश्यकता नहीं होगी। आरोप है कि प्रशासन ने इन आपत्तियों पर सुनवाई किए बिना ही अधिग्रहण के आदेश पारित कर दिए। मुआवजे को लेकर किसानों में असंतोष तीन गांवों के किसानों की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है, लेकिन प्रोजेक्ट के अन्य हिस्सों में निर्माण कार्य जारी है। चौकी जुर्नादा गांव के पास सड़क निर्माण का बेस तैयार किया जा चुका है और बारिश थमते ही काम में तेजी आने की उम्मीद है। इस बीच प्रभावित किसानों ने मुआवजे को लेकर भी नाराजगी जताई है। किसानों का कहना है कि सरकार ने जमीन के बदले चार गुना मुआवजा देने की घोषणा की थी, लेकिन उन्हें केवल दोगुना मुआवजा ही दिया जा रहा है। 98.73 किलोमीटर रोड की लागत 5,017 करोड़ उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन प्रोजेक्ट 5,017 करोड़ की लागत से बनने वाला 98.73 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड कॉरिडोर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 10 जुलाई को इसका भूमि पूजन किया। यह प्रोजेक्ट उज्जैन को सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से जोड़ता है और सिंहस्थ 2028 की तैयारियों का अहम हिस्सा है।
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