Canada's #1 Community Marketplace
Home Blog News Announcements Carpooling Pricing Register Free
politics

UP में Owaisi ने चला नया दांव, Mayawati से गठबंधन की तैयारी, Bhim and Meem साथ आये तो सपा के समीकरण बिगड़ेंगे

📰 Prabhasakshi 🕐 1 min read 📅 November 7, 2026 👁 3 views
UP में Owaisi ने चला नया दांव, Mayawati से गठबंधन की तैयारी, Bhim and Meem साथ आये तो सपा के समीकरण बिगड़ेंगे
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम और दलित वोटों को लेकर नई सियासी गोलबंदी की कोशिश तेज हो गई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सीधे उनके मुस्लिम वोट बैंक को चुनौती देना शुरू कर दिया है। इसी के साथ ओवैसी की नजर मायावती की बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन पर है। ‘भीम और मीम’ के नाम से उभर रही यह पहल यूपी की सियासत में नए समीकरण बनाने और अखिलेश यादव की राजनीतिक पकड़ को चुनौती देने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है। दरअसल, उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं के बीच समाजवादी पार्टी लंबे समय से अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ का दावा करती रही है। अखिलेश यादव की राजनीति का एक महत्वपूर्ण आधार मुस्लिम-यादव समीकरण रहा है। लेकिन ओवैसी इसी समीकरण में सेंध लगाने की रणनीति के साथ मैदान में उतरते दिखाई दे रहे हैं। उनकी सभाओं में अब भाजपा से ज्यादा समाजवादी पार्टी और उसके नेतृत्व पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ओवैसी का आरोप है कि चुनाव के वक्त मुस्लिम समुदाय से समर्थन मांगा जाता है, लेकिन सत्ता और राजनीतिक हिस्सेदारी के सवाल पर उसे अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिलता। ओवैसी की इस आक्रामकता के पीछे 2027 का चुनावी लक्ष्य साफ दिखाई देता है। वह उन विधानसभा क्षेत्रों में लगातार सभाएं कर रहे हैं, जहां समाजवादी पार्टी का प्रभाव रहा है। बहराइच के मटेरा से लेकर कैराना, रामपुर, मुरादाबाद, सहारनपुर और बिजनौर तक उनकी सभाओं का सिलसिला इसी रणनीति का हिस्सा है। कैराना की सभा में उन्होंने अखिलेश यादव पर परिवारवाद को लेकर निशाना साधा और आरोप लगाया कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से पहले मुस्लिम प्रतिनिधि चुने जाते थे, लेकिन अब वहां भी यादव परिवार के सदस्यों को राजनीतिक अवसर मिल रहे हैं। रामपुर में आजम खान का मुद्दा उठाकर ओवैसी ने अखिलेश यादव के नेतृत्व पर एक और सवाल खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब मुस्लिम नेताओं और कार्यकर्ताओं पर मुश्किलें आती हैं, तब समाजवादी पार्टी का नेतृत्व उतनी मजबूती से उनके साथ खड़ा नहीं होता, जितनी मजबूती से चुनाव के दौरान मुस्लिम मतदाताओं से समर्थन मांगता है। मुजफ्फरनगर दंगों का मुद्दा उठाकर भी वह अखिलेश सरकार के कार्यकाल को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। लेकिन ओवैसी की राजनीति का दूसरा और ज्यादा महत्वपूर्ण पहलू मायावती के साथ संभावित गठबंधन है। AIMIM के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन चाहती है। उनका कहना है कि दलितों और मुसलमानों का सामाजिक गठजोड़ स्वाभाविक राजनीतिक साझेदारी हो सकता है। पार्टी ने 2027 के चुनाव में लगभग 100 सीटों पर तैयारी करने की बात भी कही है। यहीं से यूपी की जातीय और सामाजिक राजनीति में नए समीकरण की चर्चा तेज हो जाती है। राज्य की आबादी में दलितों की हिस्सेदारी लगभग 21 प्रतिशत और मुसलमानों की हिस्सेदारी करीब 19 प्रतिशत बताई जाती है। दोनों समुदायों की सामाजिक उपस्थिति और कई विधानसभा क्षेत्रों में उनका चुनावी प्रभाव इस प्रस्तावित गठबंधन को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला रहा है। हालांकि मायावती की ओर से इस गठबंधन पर सहमति का कोई औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है। ओवैसी की नजर चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी पर भी है। देखा जाये तो ओवैसी के लिए बिहार का अनुभव भी इस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में AIMIM ने 28 सीटों पर चुनाव लड़कर पांच सीटें जीती थीं। इसके बाद उत्तर प्रदेश में भी पार्टी अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और सीटों पर दावेदारी को लेकर अधिक सक्रिय नजर आ रही है। इसके उलट 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में AIMIM ने 95 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उसे कोई सीट नहीं मिली थी और पार्टी का कुल वोट प्रतिशत लगभग दो फीसदी रहा था। इस बीच, भाजपा भी ओवैसी की मायावती से नजदीकी की कोशिशों को राजनीतिक नजरिए से देख रही है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने इसे सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि यदि AIMIM और BSP साथ आते हैं तो मुस्लिम मतों के विभाजन का असर समाजवादी पार्टी पर पड़ सकता है। इस तरह, अखिलेश यादव के सामने अब चुनौती सिर्फ भाजपा से मुकाबले की नहीं, बल्कि अपने पारंपरिक राजनीतिक आधार को संभाले रखने की भी है। ओवैसी मुस्लिम मतदाताओं के बीच राजनीतिक हिस्सेदारी का सवाल उठा रहे हैं, जबकि मायावती के साथ संभावित गठबंधन की चर्चा दलित राजनीति को भी इस बहस के केंद्र में ला रही है। बहरहाल, यूपी की सियासत में चुनाव से पहले गठबंधन बनते और बिगड़ते रहे हैं, लेकिन इस बार ‘भीम और मीम’ की चर्चा ने मुकाबले के पुराने समीकरणों को फिर बहस में ला दिया है। सवाल यह है कि क्या ओवैसी और मायावती के बीच राजनीतिक तालमेल की जमीन तैयार होगी या यह पहल समाजवादी पार्टी पर दबाव बनाने की रणनीति तक सीमित रहेगी? फिलहाल इतना तय है कि 2027 की चुनावी बिसात पर मुस्लिम प्रतिनिधित्व, दलित नेतृत्व और राजनीतिक हिस्सेदारी के सवालों ने नई जगह बना ली है। -नीरज कुमार दुबे
Read full article on Prabhasakshi

Related News

🤖
GoBazaar Assistant
Search listings, jobs, events & more
👋 Hi! I can help you find anything on GoBazaar.
Try asking me something like:
"Room for rent under $800 in Calgary"
Select Location
All Canada
Alberta
British Columbia
Manitoba
New Brunswick
Nova Scotia
Ontario
Quebec
Saskatchewan