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US Midterm Elections: 55% अमेरिकी हुए खिलाफ! कांग्रेस के प्रतिनिधि सभा और सीनेट चुनाव में पिछड़े डोनाल्ड ड्रंप; ताजा आंकड़े जारी
US Midterm Elections: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक किस्मत का फैसला होने वाला है. अगले डेढ़ महीने के भीतर या कहें आगामी 3 नवंबर, 2026 को यह तय हो जाएगा कि डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति रहेंगे या नहीं? इसके साथ ही वर्ष 2026 के अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के लिए शुक्रवार (18 सितंबर, 2026) से प्रत्यक्ष अग्रिम मतदान की प्रक्रिया शुरू हो गई है. दरअसल, इसके नतीजे यानी 3 नवंबर को होने वाला चुनाव परिणाम यह तय करेगा कि अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधि सभा और सीनेट पर किस दल का नियंत्रण रहेगा- डेमोक्रेट्स या फिर रिपब्लिकन पार्टी. क्यों चुनाव हार सकते हैं डोनाल्ड ट्रंप? अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी सत्ता में है और बतौर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार अपनी नीतियों को लेकर चर्चा में हैं या कहें खासतौर से उनकी आर्थिक नीतियों की आलोचना हो रही है. इसके साथ ही ईरान के साथ युद्ध के बीच देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिर से बढ़ रही हैं. उधर, महंगाई काबू में नहीं आ रही है. आलम यह है कि घर खरीदने के लिए मिलने वाले होम लोन की ब्याज दरें भी आसमान छू रही हैं. आर्थिक परेशानियों के बावजूद रिपब्लिकन पार्टी के नेता जनता के सामने खुद ताकतवर दिखाने की कवायद में जुटे हैं. उधर, राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि 3 नवंबर की तारीख आने से पहले ही अमेरिका के करोड़ों नागरिक अपना वोट डाल चुके होंगे. बेशक लोगों में नाराजगी है और बताया जा रहा है कि सीनेट का चुनाव रिपब्लिकन पार्टी हार सकती है और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का राष्ट्रपति का पद भी चला जाएगा! डेमोक्रेट्स ने महंगाई को बनाया मुद्दा ईरान के साथ युद्ध को लेकर अमेरिका की आम जनता राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहले ही आलोचना कर रही है. ऊपर से महंगाई ने अमेरिकी नागरिकों की जिंदगी तक प्रभावित की है. अमेरिका में मिडटर्म चुनाव यह तय करेगा कि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के बचे हुए समय में अमेरिकी संसद पर उनकी रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा रहेगा या फिर विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी बाजी मार ले जाएगी.ऐसे में विपक्ष सक्रिय है और डेमोक्रेट्स ने देश में बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-डीजल के दाम और बिगड़ती अर्थव्यवस्था को मुद्दा बनाया हुआ है. इन सभी के लिए विपक्ष सीधे तौर पर डोनाल्ड ड्रंप को सीधे जिम्मेदार ठहराया है. बैकफुट पर डोनाल्ड ट्रंप! इस बीच एक डरावने नए पोल के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मिडटर्म चुनावों को लेकर गंभीर सच्चाई का एहसास हुआ है. इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने निजी तौर पर खुद को ही इसके लिए जिम्मेदार माना है. डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से समर्थकों से कहा है कि वे ऐसा व्यवहार करें जैसे वे खुद चुनाव लड़ रहे हों. यह भी दावा किया है कि मुश्किल मिडटर्म मुकाबलों में वे रिपब्लिकन के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं. इस नई रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ने अपने करीबी सलाहकारों को निजी तौर पर संकेत दिया है कि उनके कार्यकाल के शुरुआती दो वर्षों में उनके अपने कार्यों के कारण नवंबर के चुनावों में उनकी पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. डोनाल्ड ट्रंप को एहसास, वो हुए अलोकप्रिय वहीं, डोनाल्ड ट्रंप के एक करीबी शख्स ने ‘वाशिंगटन पोस्ट’ को बताया कि राष्ट्रपति निश्चित रूप से महसूस करते हैं कि उनके कुछ फैसलों के कारण ऐसी स्थिति बनी है जिसमें वे अलोकप्रिय हो गए हैं और मिडटर्म चुनावों के लिए हालात अच्छे नहीं दिख रहे हैं. ‘वाशिंगटन पोस्ट’ के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों की जानकारी रखने वाले 4 लोगों का हवाला देते हुए कहा गया है कि इस गंभीर एहसास के बाद राष्ट्रपति रिपब्लिकन की संभावित चुनावी हार को कम करने के लिए और अधिक तत्पर हो गए हैं. डर कहीं सच ना हो जाए राष्ट्रपति की आशंकाएं हकीकत पर आधारित हो सकती हैं, क्योंकि रविवार (20 सितंबर, 2026) को जारी NBC के नए पोल से पता चला है कि आधे से अधिक अमेरिकी (55 प्रतिशत) मानते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ने अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है. NBC के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप की कुल अप्रूवल रेटिंग 41 प्रतिशत है, जो उनके दूसरे कार्यकाल में सबसे कम है. डोनाल्ड ट्रंप ने अहम मिडटर्म राज्यों में अपना पैसा लगाया है. ‘नो गोइंग बैक PAC इंक’, जो ट्रंप की ‘MAGA इंक’ से जुड़ी है. उसने विज्ञापन के लिए 68 मिलियन डॉलर से अधिक की राशि आरक्षित की है. NBC के पोल में रिपब्लिकन के लिए एक अच्छी बात यह है कि कांग्रेस पर नियंत्रण की लड़ाई में डेमोक्रेट दरअसल, रिपब्लिकन से केवल पांच अंक आगे हैं (50 प्रतिशत बनाम 45 प्रतिशत), जो 2018 के मिडटर्म चुनाव चक्र में उनकी 12 अंकों की बढ़त की तुलना में काफी कम है. डेमोक्रेट्स-रिपब्लिकन में है कड़ी लड़ाई ज़्यादातर जानकारों का अनुमान है कि डेमोक्रेट्स US हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स (प्रतिनिधि सभा) में फिर से जीत हासिल करेंगे, क्योंकि रिपब्लिकन कांग्रेस के उम्मीदवारों के लिए उत्साह बढ़ाने और अर्थव्यवस्था तथा ईरान में युद्ध को लेकर मतदाताओं की चिंताओं को दूर करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. यह भी बताया जा रहा है कि सीनेट की लड़ाई और भी कड़ी होगी, क्योंकि मेन, ओहियो, मिशिगन और अलास्का में होने वाले कड़े मुक़ाबले ही तय करेंगे कि सदन पर किसका नियंत्रण होगा? प्रचार के बीच वोटिंग जारी गुरुवार (17 सितंबर, 2026) को जारी कैरोलिना जर्नल के एक पोल में कूपर को 15 अंकों की बढ़त के साथ दिखाया गया. नॉर्थ कैरोलिना की आखिरी डेमोक्रेटिक US सीनेटर के हेगन थीं, जिन्होंने 2009 से 2015 तक सेवा . लेकिन कूपर ने 2017 से 2025 तक गवर्नर के तौर पर दो कार्यकाल पूरे किए, जिससे राज्य में उनकी अच्छी-खासी पहचान बनी. ताजा अपडेट यह है कि देश भर के अहम राज्यों में प्रचार की जंग जारी है और वोटिंग भी शुरू हो चुकी है. कई राज्यों में वोटर्स को मेल-इन बैलेट भेजे जा चुके हैं और वर्जीनिया में शुक्रवार से ही इन-पर्सन अर्ली वोटिंग शुरू हो गई है.
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