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वाराणसी में डकैती-हत्या में दोषी 3 युवकों को उम्रकैद:2003 में डकैती के बाद गृहस्वामी की हत्या, पुलिस ने लगाया था गैंगस्टर
वाराणसी जिला एवं सत्र न्यायालय के विशेष न्यायालय पाक्सो-2 ने डकैती के बाद हत्या के आरोप में नामजद तीन आरोपियों को सबूतों, गवाहों और पुलिस की चार्जशीट के आधार पर दोषी माना। कोर्ट ने तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने प्रत्येक आरोपी पर 15-15 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। कोर्ट में सजा के बाद तीनों आरोपी रोने लगे, जिन्हें शाम को जेल में दाखिल किया गया। शुक्रवार को विशेष न्यायालय पाक्सो-2 ने 23 साल पुराने मामले में गवाहों और सबूतों के आधार पर जजमेंट सुनाया। कोर्ट में अभियोजन ने अंतिम जिरह को फांसी, आजीवन या अधिकतम सजा की गुहार लगाई। मुख्य अभियोजन अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि साल 2003 में वाराणसी के सारनाथ इलाके में हथियारबंद बदमाशों के एक गिरोह ने घर में जबरन घुसकर डकैती की घटना को अंजाम दिया। डकैती का विरोध करने पर अपराधियों द्वारा घर के सदस्यों पर जानलेवा हमला किया गया। जिसमें गृहस्वामी की हत्या कर दी, अन्य कई घायल हो गए। वारदात के बाद पहुंची पुलिस ने जांच के बाद केस दर्ज किया और कई गंभीर धाराएं जोड़ी गईं। मामले में राजू सिंह, विकास कुमार झा, संजय कहार और उनके अन्य साथियों को मुख्य आरोपी बनाया गया था। तफ्तीश के बाद आरोपियों पर मुकदमा चलाया गया और चार्जशीट दाखिल की। पुलिस ने तीनों आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की, सभी पर गैंगस्टर लगाया गया। विशेष गैंगस्टर कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी पैरवी जारी थी जिसके बाद आज फैसला आया। कोर्ट में 10 गवाह पेश हुए, जिन्होंने इस मामले में गवाही दी। मिर्जापुर जिले के दिघुली, थाना लालगंज निवासी राजू सिंह पुत्र धर्मराज सिंह, बिहार के मेजरगंज निवासी विकास कुमार झा पुत्र तेज नारायण झा और बिहार के शिवसागर निगवासी संजय कहार पुत्र ईश्वर कहार को आजीवन कारावास के साथ प्रत्येक पर 15-15 हजार के अर्थदण्ड से दण्डित किया।
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