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वंदेभारत स्लीपर ट्रेन में बंद हो मांसाहारी भोजन:काशी के सांस्कृतिक संसद से संतों ने उठाई मांग,बोले-रेल मंत्रालय तत्काल लागू करें नियम
काशी से नई दिल्ली के बीच प्रस्तावित वंदेभारत स्लीपर ट्रेन में यात्रियों को परोसे जाने वाले भोजन को लेकर बहस तेज हो गई है। संस्कृति संसद के मंच से गोविंद शर्मा ने संतों से चर्चा और उनकी सहमति के बाद रेल मंत्रालय से इस ट्रेन में मांसाहारी भोजन बंद करने की अपील की है। साथ ही उन्होंने वाराणसी से संचालित होने वाली सभी ट्रेनों में भी केवल शाकाहारी भोजन परोसने की मांग उठाई है। दरअसल, 31 अक्तूबर से वाराणसी-नई दिल्ली के बीच सप्ताह में छह दिन वंदेभारत स्लीपर ट्रेन के संचालन की चर्चा के बीच इसमें मिलने वाले भोजन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। काशी के धार्मिक और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों का कहना है कि जब अयोध्या से नई दिल्ली और दिल्ली से कटरा (मां वैष्णो देवी धाम) जाने वाली वंदेभारत ट्रेनों में केवल शाकाहारी भोजन की व्यवस्था है, तो काशी से चलने वाली ट्रेनों में भी ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं लागू की जा सकती? धार्मिक आस्था और खानपान की व्यवस्था पर चर्चा काशी के धार्मिक विचारधारा से जुड़े लोगों का मानना है कि धार्मिक नगरों को जोड़ने वाली ट्रेनों में भोजन की व्यवस्था स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए। इसी आधार पर वाराणसी से संचालित होने वाली वंदेभारत ट्रेनों में भी शाकाहारी भोजन की व्यवस्था लागू करने की मांग उठ रही है। अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद ने कहा कि जब अयोध्या और वैष्णो देवी रूट पर वंदेभारत में मांस नहीं परोसा जाता है तो धार्मिक नगरी काशी से जाने वाली इस ट्रेन में भी ऐसा ही नियम लागू क्यों नहीं हो रहा।
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