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विद्यापीठ में चल रहे रूसी भाषा और संस्कृति पाठ्यक्रम समापन:विद्यार्थियों ने रूसी में कविताएं सुनाईं; टंग-ट्विस्टर और प्रेजेंटेशन से दिखाया हुनर
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में 31 अगस्त से चल रहा तीन सप्ताह का रूसी भाषा एवं संस्कृति पाठ्यक्रम शनिवार को पूरा हो गया। अंग्रेजी एवं अन्य विदेशी भाषा विभाग और रूस के कोजमा मिनिन निज़नी नोवगोरोड स्टेट पेडागॉजिकल यूनिवर्सिटी के संयुक्त आयोजन में विद्यार्थियों को रूसी भाषा के साथ वहां की संस्कृति, साहित्य और दैनिक जीवन से परिचित कराया गया। समापन समारोह में विद्यार्थियों ने तीन सप्ताह में सीखी रूसी भाषा का प्रदर्शन किया। रूसी कविताओं का पाठ किया, रूसी भाषा में धन्यवाद भाषण दिया और कार्यक्रम के दौरान तैयार किए गए वीडियो व प्रेजेंटेशन दिखाए। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र भी दिए गए। तीन सप्ताह तक चलीं दो स्तर की कक्षाएं कार्यक्रम 31 अगस्त से 20 सितंबर तक चला। इसमें अलग-अलग स्तर के विद्यार्थियों के लिए कक्षाएं संचालित की गईं। पहले से रूसी भाषा पढ़ रहे विद्यार्थियों के साथ शुरुआती स्तर के विद्यार्थियों को भी सीखने का मौका मिला। कक्षाओं में भाषा के साथ रूसी साहित्य, इतिहास और संस्कृति से जुड़ी जानकारी दी गई। विद्यार्थियों ने रूसी कवियों की रचनाएं सुनाईं समापन समारोह के सांस्कृतिक चरण में एडवांस डिप्लोमा और डिप्लोमा के विद्यार्थियों ने समूह गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद विद्यार्थियों ने रूसी कवियों की रचनाओं का पाठ किया। अमन कुमार मौर्य ने रूसी कवि अलेक्जेंडर पुष्किन की कविता का सस्वर पाठ किया। निसार अहमद और मोइन अहमद ने भी रूसी भाषा में कविताएं प्रस्तुत कीं। रूसी भाषा के टंग-ट्विस्टर ने कराया मजेदार खेल समारोह में रूसी भाषा का विशेष भाषाई खेल कराया गया। बड़ी स्क्रीन पर रूसी भाषा के कठिन टंग-ट्विस्टर दिखाए गए। शिक्षकों और अतिथियों ने बारी-बारी से इन शब्दों का उच्चारण करने की कोशिश की। कठिन उच्चारण के कारण कई बार गलतियां हुईं, जिससे समारोह का माहौल काफी रोचक और हास्यपूर्ण हो गया। तीन सप्ताह में की गई गतिविधियों का वीडियो दिखाया विद्यार्थियों ने पाठ्यक्रम के दौरान की गई गतिविधियों पर वीडियो और रिपोर्ट भी प्रस्तुत की। विवेक कुमार पांडे, उदेश्य सिंह, कामना और जैस्मिन ने तीन सप्ताह की गतिविधियों पर आधारित रिपोर्ट और वीडियो प्रस्तुत किए। इसमें पाठ्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों की सीखने की गतिविधियों को दिखाया गया। रूसी में दिया धन्यवाद भाषण समारोह में छात्र आकाश यादव ने रूसी भाषा में धन्यवाद भाषण दिया। इसके बाद सुरखा भामित और उनकी टीम ने रूसी संस्कृति और दैनिक जीवन से जुड़े अनुभवों पर प्रेजेंटेशन दिया। विवेक कुमार पांडे और उनकी टीम ने भी प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों को रूसी न्यूज चैनल पर मिली जगह कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों की गतिविधियों को रूसी समाचार चैनल पर भी जगह मिली। समापन समारोह में इसे विद्यार्थियों के लिए विशेष उपलब्धि के रूप में बताया गया। रूसी शिक्षिकाओं ने विद्यार्थियों की सराहना की कार्यक्रम में रूस से आईं प्रो. नतालिया व्लादिमीरोवना श्मेलेवा और डॉ. दर्या दिमित्रिएवना वारेंसोवा मौजूद रहीं। दोनों शिक्षिकाओं ने विद्यार्थियों के उत्साह, अनुशासन और रूसी भाषा सीखने में उनकी भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के साथ हुए अनुभव भी साझा किए। चारों भाषा कौशल पर जोर मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. राजेश मिश्रा ने विद्यार्थियों को भाषा ज्ञान के महत्व के बारे में बताया और सीखी गई भाषा का उपयोग संस्थान, समाज और देश के हित में करने की बात कही। वरिष्ठ आचार्य प्रो. नलिनी श्याम ने भाषा सीखने के लिए Listening, Speaking, Reading और Writing चारों कौशलों का नियमित अभ्यास जरूरी बताया। आगे दूसरे विषयों में सहयोग पर भी चर्चा समापन समारोह के दौरान भारत-रूस अकादमिक सहयोग को भाषा और संस्कृति से आगे दूसरे विषयों तक ले जाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम समन्वयक और विभागाध्यक्ष डॉ. नीरज धनकड़ ने आयोजन में सहयोग के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन और सभी प्रतिभागियों का आभार जताया। प्रमाणपत्र बांटे, शिक्षक और विद्यार्थी रहे मौजूद कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। समारोह में डॉ. किरण सिंह, डॉ. आनंद शंकर चौधरी, डॉ. नवरतन सिंह, डॉ. नीरज सोनकर, डॉ. कविता आर्या, डॉ. रीना चटर्जी, डॉ. धीरेन्द्र कुमार पाण्डेय, डॉ. आरती विश्वकर्मा, डॉ. अंजना और डॉ. शुभम सिंह समेत शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे। डॉ. किरण सिंह ने धन्यवाद दिया, जबकि कार्यक्रम का संचालन प्रियांशी मिश्रा और सुंदरी मौर्य ने किया।
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