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विवाद में पति को नहीं मिली मुखाग्नि की अनुमति:कानपुर में इलाज के दौरान हुई थी मौत, परिजनों में मारपीट भी हुई
दिबियापुर में रहने वाली 66 साल की बेबी पाठक की कानपुर में इलाज के दौरान मौत हो गई। उनकी अंतिम विदाई भी विवादों में घिर गई। सोमवार शाम जब उनका शव स्टेशन रोड स्थित घर पहुंचा, तो संपत्ति को लेकर परिवार में झगड़ा शुरू हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि सड़क पर ही मारपीट होने लगी। पुलिस को सूचना मिली और उसने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली। बेबी पाठक की शादी साल 1984 में कानपुर देहात के झींझक के पास जुरिया गांव के अनिल पांडे से हुई थी। शादी के एक माह बाद ही बेबी अपने मायके लौट आई थीं। इसके बाद वह पुरुषों के कपड़े पहनने लगीं। बताया जाता है कि बाद में उन्होंने पति अनिल पांडे की दूसरी शादी भी करा दी थी। बेबी पाठक अपने पिता की इकलौती संतान थीं। उनके निधन के बाद संपत्ति को लेकर परिवार में झगड़ा सामने आया। अंतिम संस्कार के लिए उनके पति अनिल पांडे भी पहुंचे थे। जब वह उनकी मांग में सिंदूर भरकर अंतिम विदाई देना चाहते थे, तो परिवार के लोगों ने इसका विरोध किया। उन्हें अंतिम संस्कार में मुखाग्नि देने की इजाजत भी नहीं दी गई। काफी देर तक झगड़ा चलने के बाद परिवार के लोग अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए। पति अनिल पांडे की जगह बेबी पाठक के भतीजे गौरव पाठक ने मुखाग्नि दी। शव पर लाल चुनरी डालकर उसे मुक्ति धाम ले जाया गया। इस घटना का दुखद पहलू यह रहा कि झगड़े के कारण अंतिम संस्कार के लिए बेबी पाठक की अंतिम यात्रा रात में निकली। हिंदू रीति-रिवाजों में आमतौर पर सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार नहीं किया जाता है। लेकिन हालात ऐसे थे कि रात में ही उनका अंतिम संस्कार करना पड़ा। एक तरफ घर में मौत का मातम था, वहीं दूसरी तरफ संपत्ति और पारिवारिक झगड़े ने माहौल को और गमगीन कर दिया। जिस महिला को परिवार के बीच सम्मान से अंतिम विदाई मिलनी थी, उनकी अंतिम यात्रा विवादों के बीच पूरी हुई। यह घटना देर रात तक शहर में चर्चा का विषय बनी रही।
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