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'यह 1945 का समय नहीं है', संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष खलीलुर रहमान ने UNSC सुधारों को लेकर भरी हुंकार
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक मंचों पर इन दिनों संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) की प्रासंगिकता और उसके ढांचे में बदलाव को लेकर एक बहुत बड़ी और तीखी बहस छिड़ी हुई है। इसी कड़ी में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के नवनिर्वाचित अध्यक्ष खलीलुर रहमान ने वैश्विक सुरक्षा और भू-राजनीतिक संतुलन को लेकर एक बेहद कड़ा और स्पष्ट बयान दिया है। महासभा के अध्यक्ष के रूप में औपचारिक पदभार संभालने के बाद खलीलुर रहमान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में तत्काल, गंभीर और अर्थपूर्ण सुधारों को आगे बढ़ाने का पुरजोर संकल्प लिया है। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब पूरी दुनिया द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनाए गए पुराने और घिसे-पिटे अंतरराष्ट्रीय ढांचे से बाहर निकलकर 21वीं सदी की नई वास्तविकताओं के अनुरूप वैश्विक संस्थाओं को ढालने की मांग कर रही है। आइए विस्तार से जानते हैं कि खलीलुर रहमान ने अपने पहले संबोधन में वैश्विक सुधारों को लेकर क्या कुछ कहा है और क्यों आज संयुक्त राष्ट्र में बड़े बदलाव की सबसे ज्यादा जरूरत महसूस की जा रही है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष खलीलुर रहमान ने सुरक्षा परिषद सुधारों पर दिखाई अटूट गंभीरता स्थानीय समयानुसार मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष के रूप में शपथ ग्रहण करने के तुरंत बाद खलीलुर रहमान ने दुनिया के तमाम देशों को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने इस बात पर विशेष रूप से जोर दिया कि वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में लंबे समय से अटके पड़े अर्थपूर्ण सुधारों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह से गंभीर और प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर देशों के बीच आपसी भरोसे की भारी कमी देखने को मिल रही है, जो कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय संगठन की कार्यप्रणाली के लिए एक बड़ा खतरा है। रहमान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि इस महान संगठन को आने वाले भविष्य की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करना है और अपनी प्रासंगिकता को बचाए रखना है, तो उसे अपनी आंतरिक व्यवस्था में कुछ बहुत गहरे और दूरगामी सुधार करने ही होंगे। 'यह 1945 का समय नहीं है, दुनिया बहुत आगे बढ़ चुकी है', बोले रहमान अपने इस ऐतिहासिक भाषण के दौरान खलीलुर रहमान ने उस ऐतिहासिक संदर्भ का जिक्र किया जिस पर संयुक्त राष्ट्र की नींव टिकी हुई है। उन्होंने दो टूक अंदाज में कहा, "यह 1945 का समय नहीं है।" उनका इशारा उस दौर की तरफ था जब द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद वैश्विक शांति बनाए रखने के लिए वर्ष 1945 में संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की गई थी, और उस समय की भू-राजनीतिक परिस्थितियों के हिसाब से इसका ढांचा तैयार किया गया था। आज विडंबना यह है कि यह संस्था आज भी उसी पुरानी और पुरानी पड़ चुकी व्यवस्था के ढांचे में जकड़ी हुई है। 21वीं सदी की आधुनिक दुनिया में प्रवेश कर चुके वैश्विक समुदाय का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज की वैश्विक परिस्थितियां, आर्थिक ताकतें और देशों की आकांक्षाएं 1945 से कोसों आगे निकल चुकी हैं, इसलिए अब इस संगठन को भी आधुनिक समय के अनुकूल बदलना अनिवार्य हो गया है। इंटर-गवर्नमेंटल नेगोशिएशंस और फैसिलिटेटर्स की नियुक्ति का ऐलान सुरक्षा परिषद में सुधारों की प्रक्रिया को जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए खलीलुर रहमान ने ठोस कदम उठाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वे इस पूरी सुधार प्रक्रिया को गति देने के लिए 'इंटर-गवर्नमेंटल नेगोशिएशंस' (Inter-Governmental Negotiations) के वास्ते जल्द ही योग्य और अनुभवी 'फैसिलिटेटर्स' (सुविधा प्रदाताओं) की नियुक्ति करेंगे। उनका यह मानना है कि जब तक सभी सदस्य देशों के बीच पारदर्शी और निष्पक्ष बातचीत का दौर तेज नहीं किया जाता, तब तक सुरक्षा परिषद की वीटो पावर और इसकी स्थायी सदस्यता के स्वरूप में कोई सार्थक बदलाव लाना असंभव है। जनता और दुनिया भर के देशों की नजरों में संयुक्त राष्ट्र जैसे मुख्य वैश्विक संगठन का खोया हुआ भरोसा और विश्वसनीयता वापस हासिल करने के लिए यह बेहद जरूरी है कि किए जाने वाले सुधार केवल कागजी न हों, बल्कि उनका जमीन पर स्पष्ट प्रभाव दिखाई दे। कौन हैं खलीलुर रहमान जानिए उनका राजनयिक और कूटनीतिक सफर मूल रूप से बांग्लादेश से ताल्लुक रखने वाले खलीलुर रहमान को इसी साल जून के महीने में भारी समर्थन के साथ संयुक्त राष्ट्र महासभा का अध्यक्ष चुना गया था। उनका कूटनीतिक करियर बेहद शानदार और व्यापक अनुभव से भरा रहा है। रहमान ने इससे पहले अपने देश के संयुक्त राष्ट्र मिशन में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं। इसके अलावा, उन्होंने न्यूयॉर्क में अंकटाड (UNCTAD) के आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भी बहुत बारीकी से काम किया है। इतना ही नहीं, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के कार्यकारी कार्यालय में आर्थिक, सामाजिक और विकास से जुड़े तमाम संवेदनशील मामलों की कमान संभाली है और अपनी कार्यकुशलता का लोहा मनवाया है। अंतरराष्ट्रीय मामलों और वैश्विक अर्थशास्त्र की गहरी समझ रखने के कारण ही उन्हें इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एनालेना बेयरबाक से संभाली कमान और पारंपरिक 'थार हैमर' गैवल को किया ग्रहण इस गरिमामयी पद ग्रहण समारोह के दौरान खलीलुर रहमान ने औपचारिक रूप से अपनी पूर्ववर्ती एनालेना बेयरबाक से संयुक्त राष्ट्र महासभा की बागडोर और अध्यक्षता अपने हाथों में ली। परंपरा के अनुसार, इस दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा की कार्यवाही के संचालन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पारंपरिक और प्रतिष्ठित हथौड़े को ग्रहण किया, जिसे दुनिया भर में 'थार हैमर' (Thar Hammer) के नाम से जाना जाता है। इस गैवल को संभालते ही उन्होंने वैश्विक समुदाय को यह संदेश दे दिया कि वे अपने कार्यकाल के दौरान केवल औपचारिकताएं निभाने नहीं आए हैं, बल्कि सुरक्षा परिषद के विस्तार और उसमें आवश्यक सुधार लाने के अपने एजेंडे पर पूरी ताकत से काम करने के लिए तैयार हैं। वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज और सुरक्षा परिषद के विस्तार की मांग खलीलुर रहमान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत सहित दुनिया के कई विकासशील देश (ग्लोबल साउथ) संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मौजूदा स्वरूप पर लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं। वर्तमान में सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों (P5) के पास जो वीटो का अधिकार है, वह 1945 की ताकतों को दर्शाता है, जबकि आज की तारीख में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे बड़े क्षेत्रों की अनदेखी की जा रही है। भारत लंबे समय से यह मांग करता रहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश को स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए ताकि दुनिया की एक तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व सही मायनों में हो सके। महासभा के नए अध्यक्ष खलीलुर रहमान के इस रुख से उन देशों को एक नई उम्मीद बंधी है जो लंबे समय से यूएनएससी के विस्तार और लोकतांत्रिक सुधारों की वकालत कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि रहमान अपनी इस नई भूमिका में वैश्विक महाशक्तियों के बीच आम सहमति बनाने में कितने सफल साबित होते हैं।
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