Canada's #1 Community Marketplace
Home Blog News Announcements Pricing Register Free
politics

20 साल तक लौटने के इंतजार के बाद मिला भाई:पत्नी ने नहीं की दूसरी शादी, करवा चौथ का व्रत भी रखा; परिवार ने मान लिया था मौत हो गई

📰 Bhaskar 🕐 1 min read 📅 August 10, 2026 👁 6 views
20 साल तक लौटने के इंतजार के बाद मिला भाई:पत्नी ने नहीं की दूसरी शादी, करवा चौथ का व्रत भी रखा; परिवार ने मान लिया था मौत हो गई
20 साल से पति के लौटने का इंतजार कर रही पत्नी की उम्मीद आखिर सच हो गई। परिवार जिसे मर चुका मान चुका था, वह पति भरतपुर के अपना घर आश्रम में जिंदा मिला। झारखंड के बोकारो के रहने वाले परशुराम महतो काम की तलाश में मुंबई गए थे, लेकिन फिर घर नहीं लौटे। परिवार ने काफी तलाश के बाद उनकी मौत मान ली, लेकिन पत्नी मालती ने न दूसरी शादी की और न ही पति के जिंदा होने की उम्मीद छोड़ी। वह हर साल करवा चौथ का व्रत रखती रहीं। मार्च 2024 में कुचामन सिटी से रेस्क्यू होकर भरतपुर के अपना घर आश्रम पहुंचे परशुराम का इलाज हुआ तो उन्होंने अपने गांव का पता बताया। इसके बाद आश्रम की टीम ने गांव की प्रधान से संपर्क किया और पहचान होने पर भाई व परिवार सोमवार को उन्हें लेने पहुंचा। पढ़िए ... सिलसिलेवार पूरा घटनाक्रम कुचामन सिटी से रेस्क्यू, अपना घर आश्रम पहुंचे भरतपुर के अपना घर आश्रम के सचिव नरेंद्र तिवारी ने बताया - मार्च 2024 में कुचामन सिटी से एक मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति को भरतपुर के अपना घर आश्रम लाया गया था। वह अपना नाम-पता बताने की स्थिति में नहीं थे। आश्रम में उसी समय उनका इलाज शुरू किया गया। टीम ने उनका नाम विष्णु रखा और लगातार इलाज किया। धीरे-धीरे उनकी हालत में सुधार होने लगा। तबीयत में सुधार होने पर बताया गांव और परिवार का पता स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद विष्णु ने धीरे-धीरे अपने और परिवार के बारे में जानकारी देना शुरू किया। उन्होंने बताया कि वह झारखंड के बोकारो इलाके के गोविंदपुर गांव के रहने वाले हैं। इसके बाद अपना घर आश्रम की टीम ने परिवार की तलाश शुरू की और गांव की प्रधान अनीता कुमारी से संपर्क किया। प्रधान ने गांव में जानकारी जुटाई तो पता चला कि 20 साल पहले परशुराम महतो नाम का व्यक्ति गांव से लापता हुआ था। भाई और भतीजा भरतपुर पहुंचे तो पहचान हुई प्रधान अनीता कुमारी ने इसकी जानकारी परशुराम महतो के भाई कामेश्वर महतो को दी। इसके बाद कामेश्वर महतो अपने जीजा टिकेंद्र महतो के साथ भरतपुर के अपना घर आश्रम पहुंचे। टिकेंद्र ने परशुराम को देखते ही पहचान लिया और भावुक हो गया। टिकेंद्र ने बताया कि 20 साल पहले परशुराम इलेक्ट्रॉनिक मैकेनिक का काम करते थे। उसी दौरान बोकारो स्टील प्लांट का निर्माण हुआ और परशुराम की दुकान टूट गई। इससे उनकी मानसिक स्थिति खराब हो गई थी। उनका इलाज भी कराया गया था। बाद में मानसिक हालत में सुधार हुआ तो वह काम की तलाश में मुंबई चले गए, लेकिन फिर घर नहीं लौटे। परिवार ने उन्हें बहुत तलाश किया, लेकिन कोई पता नहीं चला। परिवार ने मान लिया था मौत हो गई परशुराम के घर नहीं लौटने और काफी तलाश के बाद भी पता नहीं चलने पर परिवार ने मान लिया था कि उनकी मौत हो गई है। हालांकि पत्नी मालती ने कभी यह नहीं माना कि परशुराम की मौत हो सकती है। वह 20 साल तक उनके लौटने का इंतजार करती रहीं। जब परशुराम मुंबई के लिए निकले थे, तब उनके और मालती के कोई संतान नहीं थी। मालती ने दूसरी शादी भी नहीं की, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि परशुराम जिंदा हैं और एक दिन जरूर घर लौटेंगे। परिवार भले ही उन्हें मरा हुआ मान चुका था, लेकिन मालती सुहाग की सभी चीजें पहनती रहीं और हर साल करवा चौथ का व्रत भी रखती थीं। अब 20 साल बाद परशुराम के परिवार से मिलने पर घर में खुशी का माहौल है।
Read full article on Bhaskar

Related News

🤖
GoBazaar Assistant
Search listings, jobs, events & more
👋 Hi! I can help you find anything on GoBazaar.
Try asking me something like:
"Room for rent under $800 in Calgary"
Select Location
All Canada
Alberta
British Columbia
Manitoba
New Brunswick
Nova Scotia
Ontario
Quebec
Saskatchewan