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40 बच्चों की क्षमता वाले कमरे में 102 छात्र:रायसेन में 2 कमरों में चल रहा सरकारी स्कूल, खुले में पढ़ाते हैं टीचर
रायसेन जिले के सालेगढ़ गांव के प्राथमिक स्कूल में क्षमता से अधिक बच्चे दर्ज हैं। स्कूल भवन में 40 बच्चों के बैठने की क्षमता है, जबकि वर्तमान में 102 बच्चे पढ़ रहे हैं। स्कूल में केवल दो छोटे कमरे हैं। ऐसे में सभी बच्चों को एक साथ कमरों में बैठाना संभव नहीं है। सामान्य दिनों में कई बच्चों को खुले मैदान या पेड़ों के नीचे बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। बारिश के मौसम में परेशानी और बढ़ जाती है। कमरों और बरामदे में जगह कम होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। यह स्कूल कभी अपने नए प्रयोग और बेहतर पढ़ाई के लिए जिले में मॉडल स्कूल के रूप में जाना जाता था। वर्ष 2020 में भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय ने स्कूल पर एक डॉक्यूमेंट्री भी बनाई थी। स्कूल के शिक्षक नीरज सक्सेना को वर्ष 2022 में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। दो अतिरिक्त कमरे मिलने से सुधर सकती है व्यवस्था शिक्षक नीरज सक्सेना ने बताया कि स्कूल को दो अतिरिक्त कमरे मिल जाएं तो 102 बच्चों को बेहतर और सुरक्षित माहौल में पढ़ाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त कमरों के लिए कई बार मांग की जा चुकी है, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि बारिश के दिनों में कमरों में जगह नहीं होने पर बच्चों को बरामदे में बैठना पड़ता है। इससे उनकी पढ़ाई बाधित होती है। स्कूल में 40 बच्चों के बैठने की क्षमता है, जबकि 102 बच्चे दर्ज हैं। दो अतिरिक्त कमरों की मांग की जा रही है।
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