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आदिवासी बच्चों की मौत की जिम्मेदारी तय नहीं:कांग्रेस विधायक बोले- जवाबदेही से प्रशासनिक सख्ती आएगी, लेकिन सरकार तय नहीं कर पा रही
बालाघाट जिले के आदिवासी इलाके में बीमारी से 32 बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि प्रशासन की ओर से इन 32 बच्चों के खातों में मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत पहले 2-2 लाख और बाद में मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से 2-2 लाख रुपए और देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, बच्चों के नाम की एक लिस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले में जनसंपर्क अधिकारी से सूची के लिए संपर्क किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जिम्मेदारी तय नहीं की गई एक तरफ सागर में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले में प्रशासनिक कार्रवाई दिख रही है, वहीं बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत पर कोई जिम्मेदारी तय नहीं हुई है। इससे सरकार और प्रशासन का मौतों के मामलों पर अलग-अलग रवैया दिख रहा है, जो उनकी संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है। विधायक ने उठाए सवाल कांग्रेस विधायक और अध्यक्ष संजय उईके ने बताया कि कांग्रेस शुरुआत से ही जवाबदेही तय करने की बात कर रही है। उनका कहना है कि जवाबदेही तय होने से प्रशासनिक सख्ती आएगी और सुधार का मौका मिलेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि सागर में जिम्मेदारी तय करने वाली सरकार बालाघाट के आदिवासी बच्चों की मौत पर कोई जिम्मेदारी क्यों तय नहीं कर पा रही है। संजय उईके ने 32 बच्चों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक मदद की जानकारी होने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने 32 बच्चों को 4-4 लाख रुपए की सहायता दी है, तो इसका मतलब है कि सरकार अपनी गलती मान रही है, जिससे बच्चों की मौत हुई है। सरकार ने कहा? इस मामले में सरकार के मंत्री कुंवर विजयशाह ने बताया कि सरकार चिंतित है और हालात काबू करने की पूरी कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को जहां लगा, वहां अधिकारियों को हटाया गया है। नए अधिकारी आए हैं, जिन पर ज्यादा जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री खुद इस मामले को लेकर चिंतित हैं। दूसरी ओर, बालाघाट जिले के प्रभावित आदिवासी इलाके में बच्चों की मौत का मामला हाईकोर्ट भी पहुंच गया है। याचिकाकर्ता के तथ्य कोर्ट में पेश किए जाने के बाद, अब मामले की सुनवाई 18 सितंबर को होनी है। वहीं इस मामले में बीमारी से प्रभावित ग्रामों की व्यवस्था सुधार को लेकर दिए गए तर्क पर हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या प्रशासन 27 बैगा बच्चों की मौतों के बाद जागा है?
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