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आदिवासी बच्चों की मौत के विरोध में प्रदर्शन:1 करोड़ मुआवजे की मांग; मामला हाईकोर्ट, CJP तक पहुंचा
बालाघाट में आदिवासी इलाके में फैली बीमारी के कारण कई बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं। शनिवार को लांजी विधायक राजकुमार कर्राहे ने इन बच्चों से मुलाकात की। उन्होंने डॉक्टरों से बच्चों की सेहत और इलाज के बारे में जानकारी ली। विधायक ने अस्पताल में भर्ती बच्चों के परिजनों से भी बात की। दूसरी ओर, बालाघाट में राष्ट्रीय आदिवासी समन्वय समिति के बैनर तले देश के अलग-अलग आदिवासी इलाकों से प्रतिनिधि पहुंचे। उन्होंने बीमारियों से पीड़ित आदिवासी बच्चों की मौत को लेकर सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए। प्रतिनिधियों ने कहा कि आदिवासी इलाकों से जितना खनिज निकला है, अगर उसके सीएसआर फंड से आदिवासियों का विकास किया जाता तो आज हर आदिवासी संपन्न होता। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपए का गलत इस्तेमाल किया गया। उनका कहना था कि मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण आदिवासी गरीब जैसा जीवन जी रहे हैं और उनकी मौत हो रही है। इस बीच, शुक्रवार को बैगा आदिवासी गांव अतरिया आरामटोला के रहने वाले 10 साल के गजेंद्र मरकाम की मौत हो गई। आदिवासी समाज का दावा है कि गजेंद्र की मौत के साथ बीमारी से मरने वाले बच्चों की संख्या 31 हो गई है। यह मामला अब जबलपुर हाईकोर्ट और CJP (चाइल्ड जस्टिस प्रोटेक्शन) तक भी पहुंच गया है। CJP के अभिजीत दीपके ने बालाघाट में चल रहे आंदोलन के दौरान ललित नाम के व्यक्ति से फोन पर बात कर घटना की जानकारी ली।
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