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भगवान श्रीनाथजी के सप्तस्वरूप का उत्सव:सोने के हिंडोले में झूले; साल में एक दिन पहनते हैं केसरी रंग के मोर-काछनी
राजसमंद के श्रीनाथजी मंदिर में शुक्रवार का दिन खास रहा। सावन शुक्ल नवमी पर भगवान का सप्तस्वरूपोत्सव मनाया गया। साल में सिर्फ इसी दिन ठाकुर जी विशेष केसरी रंग के मोर-काछनी श्रृंगार में दिखते हैं। इसके बाद प्रभु को सोने के हिंडोले में विराजित किया गया। जिनके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में वैष्णव श्रद्धालु श्रीनाथजी की हवेली पहुंचे। श्रीजी को केसरी रंग की मलमल की सूथन, गोल-काछनी अर्थात मोर-काछनी और रास-पटका धराया गया। सभी वस्त्र रूपहली जरी की तुईलैस की किनारी से सुसज्जित रहे, जबकि ठाड़े वस्त्र मेघश्याम रंग के रहे। श्रीमस्तक पर केसरी रंग की जड़ाऊ टिपारे की टोपी, लाल रंग के सुनहरी किनारी वाले गौ-कर्ण, स्वर्ण का रत्नजड़ित घेरा और बायीं ओर मोती की चोटी सुशोभित रही। श्रीकर्ण में हीरे के मकराकृति कुंडल और श्रीकंठ में कली-कस्तूरी की मालाएं धराई गईं। प्रभु को वनमाला सहित भारी श्रृंगार धराया गया, जिसमें हीरे के साथ मोती, माणक, पन्ना और जड़ाव स्वर्ण के आभूषण शामिल रहे। श्रीहस्त में कमलछड़ी, हीरे के वेणुजी और दो वेत्रजी धराए गए। उत्सव के भोग मनोरथ में गोपीवल्लभ भोग के दौरान मूंग दाल की मोहनथाल और दूधघर में सिद्ध की गई केसरयुक्त बासोंदी की हांडी अरोगाई गई। वहीं राजभोग में अनसखड़ी में दाख का रायता अरोगाया गया। राजभोग दर्शन के दौरान राग सारंग में सप्तस्वरूपोत्सव से संबंधित पदों का गायन हुआ। सप्तस्वरूपोत्सव का महत्व सप्तस्वरूपोत्सव का संबंध श्रीनाथजी की सेवा के सर्वोपरि अधिकार प्राप्त करने के प्रसंग से जुड़ा है। तत्कालीन सरकार के समक्ष वर्षों तक चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद तिलकायत गोविन्दलाल महाराज ने श्रीनाथजी की सेवा के सर्वोपरि अधिकार प्राप्त किए थे। इसी विजयपर्व की स्मृति में श्रावण शुक्ल नवमी के दिन विक्रम संवत 2023 में तिलकायत गोविन्दलाल महाराज द्वारा अद्वितीय सप्तस्वरूपोत्सव आयोजित किया गया था।
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