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बिकरू कांड का आरोपी हीरू दुबे 6 साल बाद रिहा:पत्नी ने गले लगाया, वकील के पैर छुए, बोला- न्यायपालिका पर भरोसा था
कानपुर देहात में बिकरू कांड से जुड़े गैंगस्टर एक्ट के मामले में विकास दुबे के करीबी धीरेन्द्र उर्फ हीरू दुबे को शुक्रवार शाम करीब साढ़े 7 बजे जिला जेल से रिहा कर दिया गया। उसे इस मामले में 10 साल की सजा सुनाई गई थी। सजा के खिलाफ अपील के दौरान सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उसकी रिहाई हुई है। 2 जुलाई 2020 की रात कानपुर के बिकरू गांव में विकास दुबे के घर दबिश देने पहुंची पुलिस टीम पर घात लगाकर हमला किया गया था। हमले में डिप्टी एसपी समेत 8 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद विकास दुबे और उसके साथियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई थी। विकास दुबे का करीबी बताया गया हीरू बिकरू कांड की जांच में हीरू दुबे का नाम भी सामने आया था। उस पर साजिश और वारदात में शामिल होने के आरोप लगे थे। पुलिस के अनुसार, वह विकास दुबे का करीबी और भरोसेमंद सहयोगी था। विकास दुबे के भाई की पत्नी के नाम थी प्रधानी बिकरू गांव की प्रधानी विकास दुबे के भाई दीपक की पत्नी अंजली के नाम थी। पंचायत से जुड़े कामकाज में हीरू की भी सक्रिय भूमिका बताई गई। वह प्रधान प्रतिनिधि के तौर पर ब्लॉक और क्षेत्र पंचायत की बैठकों में शामिल होता था। वकील के भेष में कोर्ट पहुंचा था पुलिस की कार्रवाई शुरू होने के बाद हीरू फरार हो गया था। उस पर एक लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया। करीब एक महीने बाद अगस्त 2020 में उसने माती कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था। हीरू वकील के भेष में वकीलों के बीच कोर्ट पहुंचा था। एसटीएफ को उसके पहुंचने की जानकारी मिली। हालांकि, वकीलों के विरोध के कारण एसटीएफ पीछे हट गई। इसके बाद हीरू ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। 30 आरोपियों पर चला था गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा हीरू के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, आपराधिक साजिश, बलवा, अवैध हथियार और गैंगस्टर एक्ट समेत कई मामलों में कार्रवाई हुई। बिकरू कांड से जुड़े गैंगस्टर एक्ट के मामले में कुल 30 आरोपियों पर मुकदमा चला था। इनमें 23 आरोपियों को 10-10 साल की सजा सुनाई गई थी। 7 आरोपियों को सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया गया था। इसी मामले में हीरू दुबे को भी 10 साल की सजा हुई थी। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने पर रिहाई हीरू ने सजा के खिलाफ अपील की थी। अलग-अलग मामलों में उसकी जमानत की कानूनी प्रक्रिया भी चली। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद शुक्रवार को करीब 6 साल बाद उसकी जेल से रिहाई हुई। परिवार शाम 5 बजे पहुंचा, साढ़े 7 बजे बाहर आया हीरू हीरू के परिवार वाले शुक्रवार शाम करीब 5 बजे से जिला कारागार के बाहर पहुंच गए थे। करीब साढ़े 7 बजे हीरू जेल से बाहर आया। पत्नी उसे देखते ही आगे बढ़ी और उससे लिपट गई। इसके बाद हीरू ने अपने वकील अश्विनी त्रिपाठी के पैर छुए। फिर वह पत्नी और वकील के साथ गाड़ी में बैठकर वहां से रवाना हो गया। बोला- न्यायपालिका पर भरोसा था जेल से बाहर आने के बाद मीडिया से बातचीत में हीरू ने कहा कि उसे न्यायपालिका पर भरोसा था। बिकरू कांड को लेकर उसने कहा कि घटना किन परिस्थितियों में हुई, इसकी उसे जानकारी नहीं है। हालांकि, जो भी घटना हुई, वह गलत थी। छह साल बाद बाहर आया, अब आगे कानूनी लड़ाई करीब छह साल जेल में रहने के बाद हीरू दुबे बाहर आया है। अब उसकी कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। वहीं, 2 जुलाई 2020 की बिकरू कांड की रात उत्तर प्रदेश के अपराध इतिहास और पुलिस महकमे की बड़ी घटनाओं में दर्ज है।
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