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CG Leptospira Infection: आदिवासी इलाकों में लेप्टोस्पाइरा-स्क्रब टाइफस की पुष्टि, सरगुजा में 72 पॉजिटिव केस
CG Leptospira Infection: नॉर्थ छत्तीसगढ़ (North Chhattisgarh) के सरगुजा जिले के आदिवासी इलाकों में लेप्टोस्पाइरा (Leptospira Infection) और स्क्रब टाइफस ( Scrub Typhus ) संक्रमण के 72 पॉजिटिव केस मिले हैं। इनमें 50 मरीजों में लेप्टोस्पाइरा और 22 मरीजों में स्क्रब टाइफस संक्रमण की पुष्टि हुई है। संक्रमित मरीज पहाड़ी कोरवा और पंडो जनजाति से हैं। इनकी उम्र 9 से 65 साल के बीच है। जानवरों के पेशाब से फैलता है संक्रमण अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के HOD डॉ. पंकज टेभूलकर के मुताबिक, लेप्टोस्पाइरा संक्रमण (Bacterial Infection) जानवरों के पेशाब से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से फैल सकता है। वहीं स्क्रब टाइफस संक्रमण छोटे माइट के काटने से फैलता है। डॉक्टरों के मुताबिक, मानसून के दौरान इन संक्रमणों का खतरा बढ़ जाता है। यह भी पढ़ें: Gold Silver Rate Today 3 September: सोना हुआ पहले से ज्यादा सस्ता, चांदी की कीमतों में भी गिरावट, जानें आज का ताजा भाव 5 दिन बाद भी बुखार तो जांच जरूरी डॉक्टरों के मुताबिक, जिन मरीजों का 5 दिन बाद भी बुखार नहीं उतरता है, उनके ब्लड सैंपल की जांच की जाती है। इसके लिए एलाइजा टेस्ट (ELISA Test) के जरिए लेप्टोस्पाइरा और स्क्रब टाइफस जैसे संक्रमणों की जांच की जाती है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर मरीज का इलाज शुरू किया जाता है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर लेप्टोस्पाइरा संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। इससे किडनी और लीवर पर असर पड़ने का खतरा रहता है और गंभीर स्थिति में मरीज की मौत भी हो सकती है। हालांकि सरगुजा में सामने आए सभी 72 मरीज इलाज के बाद स्वस्थ हो गए हैं। यह भी पढ़ें: WhatsApp Bill Payments Feature : बिजली-पानी से लेकर गैस और FASTag तक, WhatsApp से भर सकेंगे कई जरूरी बिल, जानें कैसे करेगा काम दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका में ज्यादा मामले डॉ. पंकज टेभूलकर ने बताया कि लेप्टोस्पाइरा और स्क्रब टाइफस का संक्रमण दक्षिण अमेरिका के ब्राजील और पेरू सहित अफ्रीकी देशों में भी पाया जाता है। भारत में इसके मामले मुख्य रूप से दक्षिण भारत के मदुरै में सामने आए हैं। छत्तीसगढ़ के सरगुजा में आदिवासी क्षेत्र से इस तरह के मामलों का सामने आना डॉक्टरों के लिए चिंता और रिसर्च (Research) का विषय है। यह भी पढ़ें: Mathura TSI Suicide: मथुरा में टीएसआई ने सरकारी रिवॉल्वर से खुद को मारी गोली, आत्महत्या के कारणों का पता नहीं, जांच में जुटी पुलिस मेडिकल कॉलेज की टीम करेगी रिसर्च ट्राइबल इलाकों (Tribal Areas) में लगातार बुखार के बढ़ते मामलों के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन, कम्युनिटी मेडिसिन और माइक्रोबायोलॉजी विभाग की टीम मिलकर रिसर्च कर रही है। टीम प्रभावित गांवों में पहुंचकर मरीजों की जांच करेगी और जरूरी सैंपल भी लिए जाएंगे। बता दें की डॉक्टरों के अनुसार, फिलहाल सभी संक्रमित मरीज इलाज के बाद स्वस्थ हैं। संक्रमण के फैलने के कारणों और इसके स्तर को लेकर मेडिकल कॉलेज की टीम की जांच और रिसर्च जारी है। यह भी पढ़ें: Bilaspur School Teacher Bharti: एकल शिक्षकीय स्कूलों में पढ़ाएंगे युवा, बिलासपुर में संकल स्तर पर होगी भर्ती, DMF फंड से मिलेगा मानदेय
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