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डॉक्टर पति-पत्नी का डिजिटल अरेस्ट करने वाला महाराष्ट्र से गिरफ्तार:आरोपी ने फर्जी NIA अधिकारी बनकर डराया था; 76 लाख ठगे थे

📰 Bhaskar 🕐 1 min read 📅 October 30, 2026 👁 1 views
डॉक्टर पति-पत्नी का डिजिटल अरेस्ट करने वाला महाराष्ट्र से गिरफ्तार:आरोपी ने फर्जी NIA अधिकारी बनकर डराया था; 76 लाख ठगे थे
जयपुर में डॉक्टर पति-पत्नी को डिजिटल अरेस्ट कर 76 लाख रुपए की ठगी करने वाला आरोपी को महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया गया है। उसे ट्रांजिट वारंट पर जयपुर लाया गया है। आरोपी के आईसीआईसीआई बैंक खाते में ठगी की रकम में से करीब 50 लाख रुपए ट्रांसफर हुए थे। मामले में अब तक चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। ADG साइबर क्राइम विके सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी किरण लक्ष्मण ताम्हाणे पुणे (महाराष्ट्र) का रहने वाला है। उसे ठाणे से गिरफ्तार किया गया। डॉक्टर को गिरफ्तारी का दिखाया था डर आरोपी ने जयपुर निवासी बुजुर्ग डॉक्टर और उनकी पत्नी को व्हाट्सएप कॉल किया था। कॉल पर खुद को पुलिस,एटीएस और एनआईए का अधिकारी बताकर कहा था कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों और करोड़ों रुपए के वित्तीय अपराध में किया गया है। आरोपियों ने डॉक्टर पति-पत्नी की गिरफ्तारी और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई की धमकी दी थी। फर्जी एनआईए नोटिस भेजकर बनाया मानसिक दबाव आरोपियों ने व्हाट्सएप पर कथित एनआईए नोटिस भेजकर डराया था। इसके बाद कुछ दिनों में एनओसी सर्टिफिकेट और सुरक्षा प्रमाण-पत्र जारी करने का झांसा दिया था। लगातार वॉइस और वीडियो कॉल के जरिए निगरानी रखकर मानसिक दबाव बनाया गया। आरोपियों ने दंपती से फिक्स्ड डिपॉजिट की जानकारी और बैंक संबंधी दस्तावेजों की तस्वीरें भी मंगवाईं। इसके बाद आरोपियों के बताए अलग-अलग बैंक खातों में पति-पत्नी ने अपनी बचत से 76 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। बैंक खातों की मनी ट्रेल से पकड़ा गया आरोपी पुलिस ने जांच के दौरान व्हाट्सएप नंबरों, मोबाइल नंबरों की सीडीआर, सीएएफ आईडी, आईपीडीआर और बैंक खातों के रिकॉर्ड की जांच की। बैंक स्टेटमेंट से पता चला कि ठगी की रकम खाते में आने के बाद उसी दिन आरटीजीएस के जरिए दूसरे खाते में भेज दी गई। अगले दिन रकम फिर अन्य बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी गई। तकनीकी सबूतों और बैंकिंग लेन-देन के आधार पर पुलिस पहले दिल्ली और उत्तर प्रदेश से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी थी। आगे की जांच में ठगी की रकम के पहले लाभार्थी किरण लक्ष्मण ताम्हाणे की भूमिका सामने आई। पुलिस ने उसे ठाणे से गिरफ्तार कर लिया। कंपनी के खाते में आए थे 50 लाख रुपए पूछताछ में आरोपी किरण ने बताया कि उसकी कंपनी केटी मल्टी सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के आईसीआईसीआई बैंक खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी में हुआ था। इस खाते में करीब 50 लाख रुपए आए थे, जिन्हें बाद में अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। डीआईजी शान्तनु कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी ने जिगना प्रथमेश सावंत (राठौड़) और अनुराग माहेश्वरी के साथ मिलकर कंपनी के बैंक खाते की जानकारी, नेट बैंकिंग आईडी-पासवर्ड, चेकबुक और मोबाइल सिम का इस्तेमाल होने दिया। आरोपी ने पूछताछ में रियल एस्टेट में निवेश और मुनाफे पर कमीशन मिलने के आश्वासन पर बैंक संबंधी दस्तावेज और जानकारी साझा करने की बात कही। पुलिस अब व्हाट्सएप रिकॉर्ड, मोबाइल कॉल डिटेल, आईपीडीआर और बैंकिंग लेन-देन के जरिए ठगी की पूरी मनी ट्रेल खंगाल रही है। 76 लाख रुपए की रकम आगे किन-किन खातों में पहुंची और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसकी जांच की जा रही है।
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