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एरोड्रम ट्रक हादसा:संस्कृति के हाथ की सातवीं सर्जरी, पैर की नस हाथ में लगाई, ट्रक का पहिया चढ़ने से फट गई थीं सभी नसें
एरोड्रम रोड पर हुए ट्रक हादसे की डरावनी यादें आज भी लोगों के जहन में हैं। बेकाबू ट्रक ने करीब 25 से ज्यादा लोगों को टक्कर मारी थी, पांच लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 10 से ज्यादा गंभीर रूप से घायल हुए थे। हादसे में घायल छात्रा संस्कृति वर्मा के हाथ और पैर पर ट्रक का पहिया चढ़ गया था। इससे उसके पैर की ऐढ़ी पूरी तरह फट गई थी, जबकि हाथ पर पहिया चढ़ने से हड्डी में फ्रैक्चर होने के साथ नस और मांस पूरी तरह फट गया था। संस्कृति ने बताया, 15 सितंबर 2025 को शाम के समय कोचिंग से लौट रही थी। तब उसे बेकाबू ट्रक ने चपेट में लिया था। टक्कर लगने से मैं सड़क पर गिर पड़ी थी। हादसा इतना भयावह था कि उसे याद कर आज भी डर जाती हूं। मेरे हाथ-पैर पूरी तरह डैमेज हो गए थे। मेरी 7वीं सर्जरी मुंबई के बॉम्बे हॉस्पिटल में हुई। डॉ. अमरेश सिंह ने 5 घंटे हाथ का ऑपरेशन किया। मेरा हाथ अलग होने जैसी स्थिति में आ गया था। डॉक्टर ने पैर की नस निकालकर हाथों में डाली, जबकि कमर का मांस निकालकर हाथों में लगाया। 13 महीनों के दौरान मैं हाथ का उपयोग नहीं कर पाई। इस सर्जरी के बाद अब हाथ बैलेंस हुआ है और मूवमेंट करने लगा है। हालांकि अभी वजन नहीं उठा पा रही हूं। 3 महीने पढ़ाई कर 12वीं 72% लाकर पास हुई संस्कृति ने बताया, सितंबर में हादसे का बाद पढ़ाई पूरी तरह छूट गई थी। सवा महीने से हाथ-पैर की चार सर्जरी हुई थी। जनवरी में सर्जरी के बाद परीक्षा देना मुश्किल था। नवंबर से लेकर जनवरी तक तीन महीनों में जैसे-तैसे पढ़ाई की। परीक्षा देने के लिए राइटर मिला, जिसकी मदद से 12वीं की परीक्षा दे सकी। मैंने 12वीं 72% अंक हासिल किए और अब ओल्ड जीडीसी में बीकॉम में एडमिशन लिया है। मेरा लक्ष्य चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) बनना है, जिसके लिए मैं जनवरी से कोचिंग शुरू करूंगी। छह महीने तक तो बिस्तर पर ही पड़ी रही थी संस्कृति ने बताया, हादसे के बाद पैर और हाथ ने पूरी तरह काम करना बंद कर दिया था। 6 महीने मैं बिस्तर पर पड़ी रही। हाथ-पैर मूवमेंट नहीं कर रहे थे। दर्द के कारण लगता था अब जान नहीं बचेगी। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मुझसे तीन बार मिलने घर आए। कलेक्टर शिवम वर्मा और सीएमएचओ डॉ. माधव हसनानी हर हफ्ते मेरी जानकारी लेते थे। वे लोग मुझसे वीडियो कॉल पर बात कर आत्मविश्वास जगाते रहे। एक साल से चल रहे लगातार इलाज के बाद अब स्थिति में सुधार हो रहा है।
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