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ग्वालियर नगर निगम सदन में हंगामा, एजेंडा फाड़ा:जलभराव और सड़कों के मुद्दे पर BJP पार्षदों का प्रदर्शन
ग्वालियर नगर निगम का विशेष सम्मेलन सोमवार को शहर की समस्याओं पर चर्चा के बजाय सियासी हंगामे का अखाड़ा बन गया। जलभराव और बदहाल सड़कों के मुद्दे पर भाजपा पार्षदों का गुस्सा फूट पड़ा। पार्षद बृजेश श्रीवास और आशा चौहान ने बैठक का एजेंडा फाड़कर विरोध जताया। इसके बाद भाजपा पार्षदों ने सभापति की आसंदी को घेर लिया। हंगामा बढ़ने पर बैठक को तीन बार स्थगित करना पड़ा। पार्षदों ने चेतावनी दी कि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे बोरी-बिस्तर लेकर सदन में ही धरने पर बैठेंगे। पार्षदों का आरोप था कि निगम की बैठकों में शहर की समस्याओं के समाधान के लिए आदेश तो दिए जाते हैं, लेकिन उनका असर जमीन पर दिखाई नहीं देता। जलभराव से शहर के कई इलाकों में परेशानी है और सड़कें गड्ढों में तब्दील हैं। ऐसे में केवल बैठकों और आश्वासनों से समस्या दूर नहीं होगी। इसी बात को लेकर पार्षदों ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। आसंदी का घेराव, तीन बार स्थगित हुई बैठक विरोध के दौरान भाजपा पार्षद सभापति की आसंदी तक पहुंच गए और जोरदार नारेबाजी व विरोध किया। स्थिति बिगड़ती देख सदन की कार्यवाही तीन बार स्थगित करनी पड़ी। पार्षदों ने कहा कि जब तक जलभराव और सड़कों की समस्या के समाधान के लिए ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। वहीं महापौर डॉ. शोभा सिंह सिकरवार ने भाजपा पार्षदों के हंगामे पर पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा पार्षद जानबूझकर सदन की कार्यवाही बाधित करते हैं। एजेंडे पर चर्चा करने के बजाय दूसरे मुद्दे उठाए जाते हैं और अधिकारियों पर दबाव बनाने का प्रयास किया जाता है। छह महीने से अटके दो बिंदु इस विशेष सम्मेलन का एजेंडा भी लंबे समय से विवाद में है। पहली बैठक 2 फरवरी 2026 को बुलाई गई थी। एजेंडे में कुल 10 बिंदु थे, जिनमें से 8 पर बहस हो चुकी है, लेकिन दो बिंदु अब भी विवाद की वजह बने हुए हैं। कई महीने में कई बैठकें होने के बावजूद इन मुद्दों का समाधान नहीं निकल पाया है।
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