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GKS 2026 Scholarship: किसान की बेटी का विदेश में पढ़ाई का सपना हुआ पूरा, यहां से करेंगी मास्टर्स, मिला 96 लाख
GKS 2026 Scholarship: कभी सीमित संसाधनों के बीच गांव में पढ़ाई करने वाली बिहार के बांका जिले की कुमारी जानू ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है. अमरपुर प्रखंड के सलेमपुर गांव की रहने वाली जानू का चयन Global Korea Scholarship (GKS) 2026 के लिए हुआ है. यह उपलब्धि उनके परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है. GKS के तहत जानू को दक्षिण कोरिया की Sun Moon University में International Relations की पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा. यह स्कॉलरशिप उनके लिए सिर्फ विदेश में पढ़ने का मौका नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और आत्मविश्वास का परिणाम है. उन्हें 96 लाख का स्कॉलरशिप मिला है. देशभर के 52 छात्रों में बिहार से सिर्फ दो चयन GKS 2026 की चयन प्रक्रिया में देशभर से 52 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को चुना गया. बिहार से केवल दो छात्राओं को यह अवसर मिला, जिनमें बांका की जानू और बेगूसराय की नेहा कुमारी शामिल हैं. जानू की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि बांका जिले से किसी छात्रा के इस प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप के लिए चुने जाने की यह पहली ऐसी उपलब्धि बताई जा रही है. स्कॉलरशिप में पढ़ाई से लेकर रहने तक का खर्च जानकारी के मुताबिक, स्कॉलरशिप अवधि 1 सितंबर 2026 से 31 अगस्त 2029 तक रहेगी. कार्यक्रम के शुरुआती चरण में जानू को कोरियाई भाषा की ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसके बाद मास्टर्स की पढ़ाई होगी. स्कॉलरशिप में ट्यूशन फीस, रहने-खाने का खर्च, स्वास्थ्य बीमा और हवाई यात्रा जैसी सुविधाएं शामिल हैं. इससे आर्थिक रूप से सीमित परिवार से आने वाली जानू के लिए विदेश में उच्च शिक्षा का रास्ता आसान हुआ है. गांव के स्कूल से शुरू हुई पढ़ाई जानू की शुरुआती शिक्षा सलेमपुर के गांधी संस्कृत प्राइमरी एवं मिडिल स्कूल में हुई. इसके बाद उन्होंने सलेमपुर हाई स्कूल से 12वीं की पढ़ाई पूरी की. आगे उन्होंने भागलपुर के शारदा झुनझुनवाला कॉलेज से English Honours में स्नातक किया. ग्रेजुएशन के दौरान Political Science पढ़ने के साथ उनकी रुचि International Relations में बढ़ी. यही रुचि आगे उनके करियर की दिशा बनी. Self-Study और मोबाइल से दूरी बनी ताकत जानू के परिवार और शिक्षकों के अनुसार, पढ़ाई के प्रति उनका अनुशासन उनकी सफलता की बड़ी वजह रहा. उन्होंने सेल्फ-स्टडी को प्राथमिकता दी और मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी जरूरत के मुताबिक सीमित रखा. आर्थिक परिस्थितियां आसान नहीं थीं, लेकिन जानू ने पढ़ाई नहीं छोड़ी. GKS के बारे में जानकारी मिलने के बाद उन्होंने परीक्षा की तैयारी की और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की. विदेश में पढ़ाई के साथ UPSC की तैयारी जानू का लक्ष्य सिर्फ विदेश जाकर डिग्री हासिल करना नहीं है. वह दक्षिण कोरिया में पढ़ाई के दौरान UPSC Civil Services Examination की तैयारी जारी रखना चाहती हैं. उनका सपना प्रशासनिक सेवा में शामिल होकर देश और समाज की सेवा करना है. जानू की कहानी दिखाती है कि मजबूत इरादा, अनुशासन और लगातार self-study के दम पर छोटे शहर और सीमित संसाधनों से निकलकर भी दुनिया के बड़े अवसरों तक पहुंचा जा सकता है. ये भी पढ़ें... CBSE 12th Compartment Result 2026 Declared: सीबीएसई 12वीं सप्लीमेंट्री रिजल्ट cbse.gov.in पर जारी, ऐसे यहां से करें चेकN Chandrasekaran Education: एन. चंद्रशेखरन ने क्या की पढ़ाई, कौन सी है डिग्री? कैसे सरकारी स्कूल से Tata Sons के बने चेयरमैन
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