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हकेवि में संस्कृत सप्ताह का हुआ समापन
हकेवि में संस्कृत सप्ताह का हुआ समापन हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ के संस्कृत विभाग द्वारा आयोजित संस्कृत सप्ताह-2026 का मंगलवार को समापन हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती-वन्दना एवं वैदिक मन्त्रों के साथ दीप प्रज्वलन से हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार ने अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृत विभाग की विभागाध्यक्ष एवं अधिष्ठाता प्रो. पायल कंवर चन्देल ने की। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रो. बृजेश कुमार पाण्डेय उपस्थित रहे। उन्होंने भारत के सन्दर्भ में संस्कृत का महत्त्व विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। प्रो. बृजेश पाण्डेय ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-परम्परा एवं सांस्कृतिक चेतना की आधारभूत भाषा है। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं के विकास में संस्कृत का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है तथा संस्कृत विश्व को एकात्मता के सूत्र में बाँधने वाली भाषा है। प्रत्येक भारतीय के लिए संस्कृत का अध्ययन अत्यन्त आवश्यक है। उन्होंने भारतीय संविधान एवं उसकी व्याख्या के संदर्भ में भी संस्कृत की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। साथ ही योग, भारतीय दर्शन तथा चतुष्पुरुषार्थ की चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय जीवन-दृष्टि एवं उसके मूल सिद्धान्तों का विशाल भण्डार संस्कृत वाङ्मय में सुरक्षित है। प्रो. पाण्डेय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के सन्दर्भ में भारतीय ज्ञान परम्परा के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा कि आज विश्वविद्यालयों में भारतीय ज्ञान-परम्परा के अध्ययन पर विशेष बल दिया जा रहा है। व्याख्यान के दौरान उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं संस्कृत के पारस्परिक सम्बन्ध पर भी विशेष चर्चा की। इसके पश्चात् विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुतियां दी गई। कार्यक्रम के अगले चरण में संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। साथ ही प्रतियोगिताओं में निर्णायक के रूप में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले निर्णायकों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अन्त में संस्कृत विभाग के प्राध्यापक डॉ. सुमित शर्मा ने धन्यवाद-ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का मंच-संचालन संस्कृत विभाग की प्राध्यापिका डॉ. सुमन रानी ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से प्रो. नन्दकिशोर, प्रो. रेणु यादव, डॉ. अजयपाल, डॉ. नवीन, डॉ. इन्दुबाला, डॉ. अमिता, डॉ. छत्रपाल मीना, डॉ. नीरज कर्ण सिंह, डॉ. दिलीप पटेल, डॉ. सुनील अग्रवाल एवं डॉ. संजीत सहित संस्कृत विभाग के समस्त प्राध्यापकगण, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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