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IAS Story: IIT से B.Tech, फिर IAS अफसर बने ज्ञानेंद्र गंगवार, जानिए कहां हो गए थे ‘लापता’

📰 Inkhabar 🕐 1 min read 📅 August 23, 2026 👁 3 views
IAS Story: IIT से B.Tech, फिर IAS अफसर बने ज्ञानेंद्र गंगवार, जानिए कहां हो गए थे ‘लापता’
IAS Officer Gyanendra Kumar Gangwar: कर्नाटक के IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही ‘लापता’ होने की खबरों पर अब तस्वीर साफ हो गई है. कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने बताया कि गंगवार सुरक्षित हैं और अपने पिता की तबीयत बिगड़ने के बाद पारिवारिक आपात स्थिति के चलते उत्तर प्रदेश स्थित अपने पैतृक घर गए थे. गंगवार से 20 अगस्त से उनके सरकारी फोन पर संपर्क नहीं हो पा रहा था. शुरुआती जानकारी में उनकी आखिरी लोकेशन बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बताई गई थी. इसी वजह से उनके ‘लापता’ होने की खबर सामने आई और मामले ने तेजी से तूल पकड़ लिया. कौन हैं IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार? ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार 2016 बैच के IAS अधिकारी हैं और फिलहाल कर्नाटक के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में Director, MSME के पद पर कार्यरत हैं. इससे पहले वह कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) में Controller of Examinations के पद पर भी काम कर चुके हैं. उन्हें इस पद से मार्च 2026 में हटाया गया था. उनके अचानक संपर्क से बाहर होने की खबर ऐसे समय आई जब KPSC से जुड़े एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हाल ही में तलाशी अभियान चलाया था. इसी वजह से सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में दोनों घटनाओं के बीच संभावित संबंध की अटकलें लगने लगीं. ज्ञानेंद्र ने IIT Kanpur से BTech in Electrical and Electronics Engineering की पढ़ाई पूरी करने के बाद यूपीएससी की परीक्षा को पास करने में सफल रहे. पिता की तबीयत बनी वजह गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि गंगवार के पिता हृदय रोगी हैं और उनकी तबीयत में अचानक बदलाव आने के बाद अधिकारी को तत्काल उत्तर प्रदेश जाना पड़ा. मंत्री के अनुसार, गंगवार ने संबंधित अधिकारियों को एक हस्तलिखित छुट्टी आवेदन भी दिया था. इसमें उन्होंने पारिवारिक परिस्थितियों के कारण करीब एक सप्ताह की छुट्टी मांगी थी. हालांकि, छुट्टी की औपचारिक प्रक्रिया तुरंत पूरी नहीं हो सकी क्योंकि उस समय सरकारी कार्यालय पूरी तरह से काम नहीं कर रहे थे. यहां से एक अहम बात सामने आती है कि गंगवार के अचानक यात्रा पर जाने और सरकारी फोन बंद रहने के बीच सही समय पर कम्युनिकेशन नहीं हो पाया. इसी कम्युनिकेशन गैप ने “missing” जैसी स्थिति की धारणा पैदा कर दी. क्या ED की छापेमारी से कोई संबंध है? प्रियांक खड़गे ने स्पष्ट किया कि गंगवार की अनुपस्थिति का KPSC में हुई ED की तलाशी से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद IAS अधिकारी से बात की है और गंगवार ने भी ऐसी किसी कड़ी से इनकार किया है. मंत्री के मुताबिक, गंगवार ने यह भी कहा है कि अगर किसी सरकारी एजेंसी की ओर से जांच शुरू की जाती है, तो वह उसका सामना करने के लिए तैयार हैं. फिलहाल उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं है और किसी ने उनके खिलाफ जांच की मांग को लेकर आवेदन भी नहीं दिया है. KPSC से पहले क्या जुड़ा था मामला? गंगवार KPSC में Controller of Examinations के रूप में काम कर चुके हैं. उन्हें मार्च में इस जिम्मेदारी से हटाया गया था. बाद में KPSC से जुड़े कथित भर्ती अनियमितताओं के मामले में ED की कार्रवाई हुई. यही पृष्ठभूमि उनके अचानक संपर्क से बाहर होने की खबर के साथ जुड़ गई और मामले ने राजनीतिक तथा प्रशासनिक स्तर पर भी ध्यान खींचा. हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर दोनों घटनाओं को सीधे जोड़ना सही नहीं होगा. मंत्री ने खुद इस संबंध को खारिज किया है. पहले ‘लापता’, फिर सामने आई पूरी तस्वीर शनिवार को जब मीडिया ने गंगवार की स्थिति को लेकर सवाल किया था, तब सरकार के पास भी पूरी जानकारी नहीं थी. उस समय अधिकारियों को केवल इतना पता था कि वह कुछ दिनों से संपर्क में नहीं हैं और उनकी आखिरी जानकारी एयरपोर्ट से जुड़ी थी. बाद में संपर्क होने पर उनके उत्तर प्रदेश में होने की पुष्टि हुई. गंगवार ने सरकार को बताया कि पारिवारिक आपात स्थिति के कारण वह ठीक से संपर्क नहीं कर सके और आने वाले दिनों में कर्नाटक लौटकर छुट्टी से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करेंगे. आखिर इस मामले से क्या समझ आता है? IAS अधिकारी के ‘लापता’ होने की खबर ने कई सवाल खड़े किए थे, खासकर इसलिए क्योंकि मामला KPSC और ED की कार्रवाई की पृष्ठभूमि में सामने आया था. लेकिन अब सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, मामला परिवार में स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति और कम्युनिकेशन गैप का था. फिलहाल गंगवार सुरक्षित हैं और उत्तर प्रदेश में अपने परिवार के साथ हैं. वहीं, ED और KPSC से जुड़ी अलग-अलग कार्रवाई अपनी प्रक्रिया के तहत चल रही है. इसलिए दोनों घटनाओं को एक ही कड़ी मानने से पहले आधिकारिक जांच या ठोस प्रमाण का इंतजार करना जरूरी है.
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