top
इजराइल चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड को झटका, 30 से नीचे सिमटने का अनुमान
इजराइल चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड को झटका, 30 से नीचे सिमटने का अनुमान करीब 90 फीसदी मतगणना में पार्टी को 26 सीटें मिलने के संकेत; 2009 के बाद सबसे कमजोर प्रदर्शन, बहुमत के लिए गठबंधन को चाहिए 61 सीटें यरुशलम। इजराइल के चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को बड़ा झटका लगता दिख रहा है। मतगणना के दौरान करीब 90 फीसदी वोटों की गिनती के बाद पार्टी को 26 सीटें मिलने का अनुमान सामने आया है। यदि अंतिम नतीजे भी इसी के आसपास रहते हैं, तो वर्ष 2009 के बाद यह लिकुड का सबसे कमजोर प्रदर्शन होगा। इजराइल की संसद में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में लिकुड की सीटों में संभावित गिरावट का असर नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन की सरकार बनाने की कोशिशों पर पड़ सकता है। हालांकि, मतगणना पूरी होने तक सीटों के आंकड़ों में बदलाव संभव है। 2020 में मिली थीं सबसे ज्यादा 36 सीटें लिकुड के पिछले चुनावी प्रदर्शन पर नजर डालें तो पार्टी ने अलग-अलग चुनावों में उतार-चढ़ाव का सामना किया है। वर्ष 2009 में उसे 27 सीटें मिली थीं। इसके बाद 2013 में 31, 2015 में 30, अप्रैल 2019 में 35 और सितंबर 2019 में 32 सीटें हासिल हुईं। वर्ष 2020 में पार्टी ने 36 सीटों के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। इसके बाद 2021 में लिकुड को 30 और 2022 में 32 सीटें मिली थीं। मौजूदा चुनाव में 26 सीटों का अनुमान सही साबित होने पर पार्टी का प्रदर्शन पिछले कई चुनावों की तुलना में कमजोर रहेगा। किसी भी गठबंधन को बहुमत के संकेत नहीं करीब 90 फीसदी मतगणना के दौरान सामने आए अनुमानों के मुताबिक, नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी और धार्मिक दलों के गठबंधन को 53 सीटें मिल सकती हैं। वहीं, मुख्य विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिलने का अनुमान है। अरब पार्टियों को मिलाकर 19 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। इन आंकड़ों के आधार पर दोनों प्रमुख गठबंधन बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों से पीछे दिखाई दे रहे हैं। अंतिम नतीजों के बाद सरकार गठन के लिए अन्य दलों का समर्थन महत्वपूर्ण हो सकता है। नेतन्याहू के सामने गठबंधन बचाने की चुनौती लिकुड की सीटों में संभावित गिरावट का असर केवल पार्टी की स्थिति तक सीमित नहीं है। इससे नेतन्याहू के गठबंधन की राजनीतिक स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। यदि सहयोगी दलों के साथ बहुमत का आंकड़ा हासिल नहीं होता है, तो सरकार बनाने के लिए नए समीकरण तलाशने पड़ सकते हैं। इजराइल की राजनीति में सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, सैन्य सेवा और सरकार के कामकाज जैसे मुद्दे अहम रहे हैं। हालांकि, केवल सीटों के आंकड़ों के आधार पर नेतन्याहू की लोकप्रियता में गिरावट की एकमात्र वजह तय नहीं की जा सकती। फिलहाल नजरें अंतिम चुनाव परिणामों पर हैं। इनके बाद ही स्पष्ट होगा कि लिकुड को कितनी सीटें मिलती हैं और नेतन्याहू के नेतृत्व वाला गठबंधन सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन जुटा पाता है या नहीं।
Read full article on Newsprahari