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जसोल बोले-चौपासनी शिक्षण संस्थानों के विकास पर 20 करोड़ खर्च:कहा- जमीन शिक्षा समिति के पास ही रहेगी; मेड़तिया बोले- ट्रस्ट में नहीं जाने देंगे संस्था
जोधपुर में चौपासनी शिक्षण संस्थाओं के संचालन को लेकर कुछ समय से दो पक्ष आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। चौपासनी शिक्षा समिति ने बुधवार को कार्यालय में संस्थाओं की प्रोग्रेस को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। वहीं दूसरे पक्ष के लोगों ने स्कूल के बाहर मीडिया से बात कर अपना पक्ष रखा। चौपासनी शिक्षा समिति के अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल ने संस्थाओं के विकास और प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया- चौपासनी शिक्षण संस्थान परिसर के डवलपमेंट के लिए 20 करोड़ की राशि के विकास कार्य हुए या चल रहे हैं। इन्होंने बताया- चौपासनी महाविद्यालय का नया भवन 6 करोड़ रुपए में हेरिटेज लुक के साथ बनकर तैयार हुआ है और उस भवन का उद्घाटन हो चुका है। साथ ही नए और बड़े क्लासरूम ब्लॉक महाराजा उम्मेद प्री-प्राइमरी स्कूल का नवीनीकरण कार्य, चौपासनी उच्च माध्यमिक विद्यालय का मरम्मत कार्य, छात्रावास अपग्रेड, स्मार्ट क्लासरूम फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और कंम्प्यूटर लैब, 120 किलोवाट सोलर पैनल इंस्टालेशन, परिसर में प्रवेश रास्ते में नई सीसी रोड और संस्थान की सुरक्षा की दृष्टि से वाऊंड्रीवाल के कार्य शामिल हैं। सम्पति की देख-रेख सम्पति का अधिकार चौपासनी शिक्षा समिति का जसोल ने बताया- चौपासनी शिक्षा समिति के संविधान के अनुसार चौपासनी परिसर स्थित सभी सम्पति की देख-रेख सम्पति का अधिकार समिति का है। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने पत्र 18 अक्टूबर 2003 को चौपासनी स्कूल भवन चौपासनी शिक्षा समिति को सुपुर्द किया गया। खसरा नंबर 63 की भूमि जो चौपासनी स्कूल के नाम से राजस्व रिकॉर्ड में थी। इसके कारण सैनिक स्कूल और चौपासनी महाविद्यालय की मान्यता के लिए व्यवधान आ रहा था। सामान्य प्रशासन राजस्थान सरकार के आदेश के अनुसार चौपासनी स्कूल के नाम दर्ज इस भूमि को चौपासनी शिक्षा समिति के नाम से राजस्व रिकॉर्ड जमाबंदी में सुधार करने के लिए यह कार्रवाई की गई। समिति के आवेदन पर राजस्व विभाग द्वारा जमाबंदी में 17 मार्च को चौपासनी शिक्षा समिति के नाम खतौनी की गई। उन्होंने कहा- जमीन शिक्षा समिति की है और उसी के पास रहेगी। मेड़तिया बोले-ट्रस्ट के तहत नहीं जाने दी जाएगी स्कूल वहीं, दूसरी तरफ मारवाड़ राजपूत संस्थान बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष शंभूसिंह मेड़तिया ने कहा- जमीन बदलकर चौपासनी संस्थान के नाम कर दी गई और अब यह संस्थान ट्रस्ट के अंडर में जा रहा है। यह जमीन पहले विश्वयुद्ध से पहले हुए युद्ध में शामिल हुए सैनिकों की दी गई राशि से यह स्कूल बना है। संघर्ष समिति इसको ट्रस्ट के अंडर नहीं जाने देगी। ट्रस्ट के सदस्यों की संख्या बढ़ाकर प्रभाव जमाने की कोशिश की जा रही है। इससे जनरल काउंसिल के निर्वाचित सदस्यों का महत्व कम हो जाएगा। यह राजपूत समाज की लड़ाई है। हमने जमीन के रिकॉर्ड में सुधार करवाकर इसे स्कूल के नाम कराया है। चौपासनी स्कूल का 112 वर्ष का इतिहास चौपासनी शिक्षा समिति के अध्यक्ष जसोल ने बताया- चौपासनी स्कूल की स्थापना 112 वर्ष पूर्व 1914 में पूर्व महाराजा सर प्रताप ने की। शिक्षा क्षेत्र में सर प्रताप के योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। इस विद्यालय में ग्रामीण और साधारण पृष्ठभूमि के विद्यार्थी कम विद्यालय शुल्क में शिक्षा प्राप्त करते हैं। इस विद्यालय में 365 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और 148 छात्रावास में रहते हैं। चौपासनी शिक्षा कोष के लिए 5 करोड़ का राशि का लक्ष्य उन्होंने बताया- चौपासनी शिक्षा समिति ने महत्वपूर्ण निर्णय लेकर छात्रवृति के लिए चौपासनी शिक्षा कोष की स्थापना की है। इस कोष के लिए 5 करोड़ रुपए की राशि का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 23 दानदाताओं द्वारा अब तक 19 लाख से अधिक की राशि का सहयोग प्राप्त किया जा चुका है। इस कोष के लिए अच्छा रेस्पांस मिल रहा है। चौपासनी शिक्षा समिति के अधीनस्थ संचालित सभी शिक्षण संस्थाओं का परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत रहा है। वहीं महाराजा हनवंत सैनिक स्कूल निजी मोड (पीपीपी मोड) पर संचालित देश के 30 सैनिक स्कूलों में से ऑल इंडिया सैनिक स्कूल रैंकिंग में पिछले वर्ष दूसरे तथा इस वर्ष प्रथम स्थान पर रहा है। इस अवसर पर ब्रिगेडियर शक्ति सिंह, चौपासनी शिक्षा समिति के सचिव राघवेंद्र प्रताप सिंह झालामंड, कोषाध्यक्ष दलपत सिंह खींची, धनंतय सिंह, मोती सिंह राठौड़, महेश करण सिंह राठौड़ पाल, जितेन्द्र सिंह चाडी, कर्नल शंभू सिंह देवड़ा, विशन सिंह भाटी, आनंद सिंह जोधा और राजेंद्र सिंह लीलियां मौजूद थे।
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