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जातीय समीकरण भारी पड़ेंगे या जनता के मुद्दे?
राजीव शुक्ला लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का माध्यम नहीं रहे, बल्कि सामाजिक समीकरणों, राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और जनअपेक्षाओं की परीक्षा भी रहे हैं। वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव इसी लिहाज से महत्वपूर्ण होने जा रहा है। एक ओर राजनीतिक दल जातीय समीकरणों को साधने, अपने परंपरागत वोट बैंक को मजबूत करने और नए सामाजिक समूहों को अपने साथ जोड़ने की रणनीति बना रहे हैं, तो दूसरी ओर आम जनता के सामने रोजगार, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों की आय, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे बुनियादी सवाल खड़े हैं। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि आगामी ...
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