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किशोर की हत्याकांड में दोषी को उम्रकैद:हरदोई में कोर्ट ने 12,500 रुपए का लगाया जुर्माना, सात साल बाद आया फैसला
हरदोई के अरवल थाना क्षेत्र में सात वर्ष पुराने 14 वर्षीय किशोर की हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश (एडीजे-14/पॉक्सो एक्ट) दिनेश गौड़ की अदालत ने अभियुक्त बबलू को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 12,500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। पुलिस ने सोमवार शाम प्रेस नोट जारी कर फैसले की जानकारी दी। भैंस चराने गया था किशोर, वापस नहीं लौटा मामला 27 जून 2019 का है। अरवल थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने पुलिस को सूचना दी थी कि उनका 14 वर्षीय बेटा सुबह करीब 9 बजे भैंस चराने के लिए गंगा नदी के पास झाड़ियों की ओर गया था। शाम को भैंस घर लौट आई, लेकिन किशोर वापस नहीं आया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर किशोर की तलाश शुरू की। करीब तीन दिन बाद 30 जून 2019 को गांव के पास झाड़ियों में किशोर का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। पोस्टमार्टम में दुपट्टे से गला घोंटकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई। बारिश और नाले का पानी भरने के कारण शव काफी सड़ चुका था, जिससे चिकित्सीय परीक्षण में कुकर्म की पुष्टि नहीं हो सकी। गवाह की गवाही बनी अहम कड़ी पुलिस जांच में सामने आया कि घटना वाले दिन दोपहर करीब 12 बजे गांव निवासी मुख्य गवाह अलवर ने किशोर को आरोपी बबलू के साथ जाते हुए देखा था। पुलिस ने गांव के लोगों के बयान और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को 12 जुलाई 2019 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने कुकर्म के बाद भेद खुलने के डर से किशोर की हत्या कर शव झाड़ियों में छिपा दिया था। 7 गवाह और 18 अभिलेखीय साक्ष्य पेश मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने 7 गवाह और 18 अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत किए। विशेष अभियोजन अधिकारी मनीष कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक भगवान चंद्र वर्मा और पैरोकार रवींद्र सिंह ने मामले में प्रभावी पैरवी की। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर बबलू को आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 201 (साक्ष्य मिटाना) के तहत दोषी माना और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 12,500 रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
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