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मूंगफली मामले में एक फर्म ने जमा किए 10 लाख:रविवार को राज्यकर विभाग का आफिस खोलकर जमा कराई गई धनराशि
कोल्ड स्टोरेज में बरामद मूंगफली के मामले में राज्यकर विभाग की ओर से जांच की जा रही है। विभाग की ओर से 50 से अधिक कारोबारियों को नोटिस दिया गया था। इस मामले में एक फर्म ने रविवार को 10 लाख रुपये विभाग में जमा कराए हैं। रविवार होने के बावजूद विभाग का कार्यालय खोलकर यह पैसा जमा कराया गया। इस मामले में कोई अधिकारी कुछ खुलकर कहने को तैयार नहीं है। भाजपा महानगर के नवनियुक्त पदाधिकारी की फर्म का नाम भी सामने आने के बाद अधिकारी इस मामले से बचते नजर आ रहे हैं। कोल्ड स्टोरेज में मूंगफली पकड़ने के बाद राज्य कर विभाग की ओर से इससे जुड़े लगभग 50 कारोबारियों को नोटिस भेजकर 22 अगस्त तक जवाब मांगा गया था। लेकिन, अधिकतर लोगों ने नोटिस का जवाब नहीं दिया है। अधिकतर कारोबारी माल का स्वामित्व स्वीकारने को तैयार नहीं हैं। जबकि बिलिंग स्पष्ट रूप से उनकी फर्मों को हुई है। राज्य कर विभाग अब रिमाइंडर नोटिस देने की तैयारी में है। इसी क्रम में कोल्ड स्टोरेज में माल रखने वाली एक फर्म ने टैक्स का 10 लाख रुपया जमा कराया है। माना जा रहा है कि इसके बाद कुछ और फर्में पैसा जमा करा सकती हैं। सूत्रों की मानें तो भाजपा नेता का नाम आने के बाद विभाग के अधिकारी दबाव में हैं। एडिशनल कमिश्नर ग्रेड 1 संजय कुमार का कहना है कि इस मामले में स्टाक का मिलान किया जा रहा है। कुछ व्यापारियों की ओर से पैसा जमा कराया जा रहा है। हालांकि उन्होंने इस मामले में अधिक जानकारी न होने की बात कही है। जानिए क्या है मामला मूंगफली की खरीद-बिक्री में फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपये का कारोबार दिखाकर जीएसटी चोरी की आशंका विभाग को है। गोरखपुर के विश्वनाथ कोल्डस्टोरेज पर छापा पड़ने के बाद यह खेल पकड़ में आया था। दरअसल शाहजहांपुर से बंगाल व बिहार के लिए बिलिंग होती थी लेकिन माल गोरखपुर में ही खाली कर लिया जाता था। इसमें अहमद राइस मिल और सोनाली ट्रेडिंग कंपनी अल्लाहगंज (शाहजहांपुर) से शुरू हुई जांच में राजीव स्पाइसेज, स्नेहलता कारपोरेशन, सिद्धथ् विनायक ट्रेडर्स, वीर ट्रेडर्स, नादिया (पश्चिम बंगाल) स्थित सिद्धि विनायक ट्रेडर्स से लेनदेन का मामला भी सामने आया है। विभाग इसकी जांच कर रही है। बरेली की एसआईबी टीम ने बुधवार को अल्हागंज की सोनाली ट्रेडिग कंपनी और अहमद राइस मिल पर छापा कारकर मूंगफली की 10 करोड़ रुपये से अधिक की बिलिंग पकड़ी। लगभग 50 लाख रुपये की कर चोरी भी पकड़ी गई। जांच में पता चला कि दोनों फर्मों से गोरखपुर की सिद्धि विनायक ट्रेडर्स को करोड़ों की मूंगफली की बिक्री दिखाई गई थी। इसी बीच गोरखपुर के सचल दल को शाहजहांपुर के यादव ट्रांसपोर्ट का एक ट्रक मिला। उसे रोका गया तो उसके पास बिहार जाने का ई वे बिल मिला। लेकिन वाहन खाली था। वह बिहार गया ही नहीं। पूछताछ में पता चला कि यह माल गोरखपुर के विश्वनाथ कोल्ड स्टोरेज में उतारा गया है। जब वाहनों की टोल रिपोर्ट की जांच हुई तो कई वाहन ऐसे मिले जो गोरखपुर से आगे गए ही नहीं थे। ऐसे में माल की ढुलाई की बजाय केवल बिलों के लेनदेन के चलते मामला और संदिग्ध हो गया। इसी जांच में सिद्धि विनायक ट्रेडर्स नादिया (पश्चिम बंगाल) का नाम भी सामने आया है। गोरखपुर से नादिया और फिर नादिया से शाहजहांपुर के बीच माल की खरीद-बिक्री दिखाई गई थी। भाजपा नेता की फर्म को लेकर अधिकारी बोलने को तैयार नहीं इस मामले में भाजपा के महानगर उपाध्यक्ष मनीष जैन की फर्म सिद्धि विनायक ट्रेडर्स को भी नोटिस जारी किया गया था। 21 अगस्त को उनके गोदाम पर भी छापा पड़ा था। लेकिन उन्होंने कहा था कि यह छापा नहीं, रूटीन जांच है। उन्होंने गोदाम किसी और फर्म को किराए पर देने की बात कही है। उनकी फर्म को नोटिस जारी होने के बाद विभाग को जवाब दिया गया या नहीं, इस मामले में विभाग का कोई अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है।
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