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मुजफ्फरनगर में जज रवि कुमार दिवाकर का कार्यकाल चर्चा में:अबतक 8 हत्याकांडों के 22 दोषियों को सुनाई फांसी की सजा, 17 साल की सेवा में 35 दोषियों को मृत्युदंड
मुजफ्फरनगर में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर का करीब साढ़े आठ महीने का कार्यकाल उनके सख्त फैसलों के लिए चर्चा में रहा। इस दौरान उन्होंने हत्या के आठ गंभीर मामलों में 22 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार के अनुसार, 17 वर्ष की न्यायिक सेवा में न्यायाधीश दिवाकर अब तक 35 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुना चुके हैं। न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने 29 नवंबर 2025 को मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 में कार्यभार संभाला था। इसके बाद उन्होंने पुराने लंबित गंभीर मामलों की लगातार सुनवाई की। करीब साढ़े आठ महीने के कार्यकाल में हत्या से जुड़े आठ मामलों का निस्तारण हुआ। इनमें अधिवक्ता, किसान, होमगार्ड, महिला और छह वर्षीय बच्चे की हत्या जैसे गंभीर मामले शामिल थे। अधिवक्ता की हत्या में तीन को फांसी शहर कोतवाली क्षेत्र में 15 अक्टूबर 2019 को 40 लाख रुपये के लेनदेन के विवाद में अधिवक्ता समीर सैफी की हत्या हुई थी। अदालत ने 6 अप्रैल 2026 को फैसला सुनाते हुए सिंगोल अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान और शालू उर्फ अरबाज को मृत्युदंड की सजा सुनाई। 70 हजार के विवाद में किसान की हत्या भौराकलां क्षेत्र के सिसौली निवासी शेखर की वर्ष 2019 में 70 हजार रुपये के लेनदेन के विवाद में हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 28 अप्रैल 2026 को अदालत ने मुकेश, प्रदीप, संदीप और सोनू को मृत्युदंड की सजा सुनाई। महिला और छह साल के बच्चे की हत्या में भी सख्त फैसला चरथावल क्षेत्र में वर्ष 2011 में राजेश देवी और उनके छह वर्षीय बेटे हिमांशु की हत्या के मामले में दोषी रईस उर्फ रहीस निवासी बरेली को 30 मई 2026 को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। मां और मासूम की हत्या के इस मामले में अदालत का फैसला महत्वपूर्ण माना गया। होमगार्ड की हत्या में दीपक को मृत्युदंड शहर कोतवाली क्षेत्र के बुढ़ाना मोड़ पर वर्ष 2020 में ड्यूटी के दौरान होमगार्ड रतिराम की हत्या कर दी गई थी। अदालत ने 2 जुलाई 2026 को दोषी दीपक को मृत्युदंड की सजा सुनाई। किसान राज सिंह हत्याकांड में चार को फांसी शामली के कुड़ाना गांव के जंगल में 11 अगस्त 2011 को किसान राज सिंह की हत्या हुई थी। मामले में अदालत ने 17 जुलाई 2026 को सुनील, अनिल, अजीत और सूरज उर्फ काला को मृत्युदंड की सजा सुनाई। सालिम और पवन हत्याकांड में भी मृत्युदंड छपार क्षेत्र के तेजलहेड़ा में लकड़ी ठेकेदार सालिम की हत्या के मामले में 12 अगस्त 2026 को दोषी शाहनवाज को मृत्युदंड सुनाया गया। इसके अगले दिन 13 अगस्त को शामली के भभीसा गांव में हुए पवन हत्याकांड में चार दोषियों को फांसी की सजा दी गई। इन फैसलों के साथ मुजफ्फरनगर में न्यायाधीश दिवाकर द्वारा मृत्युदंड पाने वाले दोषियों की संख्या 22 हो गई। 17 साल की सेवा में 35 मृत्युदंड रवि कुमार दिवाकर ने वर्ष 2009 में न्यायिक सेवा शुरू की थी। मुजफ्फरनगर से पहले संभल और बरेली में तैनाती के दौरान हत्या के मामलों में 13 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी। मुजफ्फरनगर में 22 दोषियों को मृत्युदंड दिए जाने के बाद उनकी न्यायिक सेवा में यह आंकड़ा 35 तक पहुंच गया है। ज्ञानवापी और संभल सर्वे के आदेशों से भी रहे चर्चा में न्यायिक सेवा के दौरान रवि कुमार दिवाकर कई महत्वपूर्ण आदेशों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे। अयोध्या में तैनाती के दौरान ज्ञानवापी परिसर के सर्वे से जुड़े आदेश और संभल में मस्जिद के सर्वे से जुड़े मामले में उनके आदेश सुर्खियों में रहे थे। फास्ट ट्रैक कोर्ट में पुराने मामलों का निस्तारण शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार के मुताबिक, फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 में पुराने गंभीर मामलों की लगातार सुनवाई और निस्तारण से लंबे समय से फैसले की प्रतीक्षा कर रहे पीड़ित परिवारों को राहत मिली। हालांकि, मृत्युदंड के मामलों में निचली अदालत के फैसले के बाद कानून के अनुसार उच्च न्यायालय की पुष्टि समेत आगे की न्यायिक प्रक्रिया भी होती है।
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