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मंत्री और विभाग आमने-सामने:10 शराब कंपनियों को नोटिस भेजा, अब वापस लेने की तैयारी
बिहार में अवैध शराब की तस्करी रोकने के लिए पहली बार 10 विदेशी शराब कंपनियों को नोटिस जारी किया गया। इन कंपनियों की बड़ी खेप बिहार में पकड़ी गई थी। पिछले 10 साल में पहली बार मद्य निषेध विभाग ने शराब निर्माता कंपनियों को कारण बताओ नोटिस दिया था। नोटिस के बाद शराब कंपनियों के एसोसिएशन कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज ने विभाग के सचिव संजय सिंह से मुलाकात की। एसोसिएशन ने उन्हें ज्ञापन सौंपा। इसके बाद विभागीय सचिव ने कंपनियों पर कार्रवाई से इनकार कर दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को नोटिस वापस लेने का निर्देश दिया है। इस संबध में सचिव संजय सिंह से फोन कर और मैसेज भेज उनका पक्ष मांगा गया। लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। दरअसल, 11 जून को विभाग के मंत्री मदन सहनी की अध्यक्षता में हुई बैठक में शराब निर्माता कंपनियों की भूमिका की जांच का निर्णय लिया गया था। बिहार में पकड़ी जा रही अवैध शराब के मामलों में कंपनियों के खिलाफ प्राथमिकी और अनुसंधान के तहत कार्रवाई की बात कही गई थी। इसके बाद विभाग ने कार्रवाई तेज की। कंपनियों को नोटिस जारी किए गए। पहली बार 10 विदेशी शराब निर्माता कंपनियों को विभाग ने भेजा था नोटिस 1 नोटिस क्यों : बिहार में पकड़ी जा रही अवैध शराब की बड़ी खेप में निर्माता कंपनियों की भूमिका की जांच और जवाबदेही तय करने के लिए नोटिस जारी किया गया। 2 यूटर्न क्यों : शराब कंपनियों के एसोसिएशन ने नोटिस पर आपत्ति जताई। सचिव से मुलाकात और ज्ञापन के बाद विभाग ने नोटिस वापस लेने का फैसला किया। इन शराब कंपनियों को जारी किया गया था नोटिस मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने 10 विदेशी शराब कंपनियों को नोटिस जारी किया है। इनमें यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड, परनोड रिकार्ड इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स लिमिटेड, रेडिको खेतान लिमिटेड, एडीएस स्पिरिट्स प्राइवेट लिमिटेड, ओएसिस डिस्टिलरीज लिमिटेड, बापुना एल्को ब्रू प्राइवेट लिमिटेड, लहाग स्पिरिट्स प्राइवेट लिमिटेड, क्वीन डिस्टिलर्स बॉटलर्स प्राइवेट लिमिटेड और जन्नत बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इन कंपनियों के बॉटलिंग प्लांट पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, चंडीगढ़ और सिक्किम सहित अन्य राज्यों में हैं। इन राज्यों में कानूनी रूप से बनी शराब की तस्करी कर बिहार लाए जाने के मामले सामने आए हैं। इसी आधार पर उत्पाद विभाग ने कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। कंपनियों की भूमिका नहीं : एसोसिएशन शराब कंपनियों के एसोसिएशन सीआईएबीसी ने विभाग के नोटिस पर आपत्ति जताई है। एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल अनंत एस अय्यर ने ज्ञापन में कहा कि जब्त शराब की बोतलों पर ब्रांड का नाम होने मात्र से निर्माता कंपनी या उसके अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की जानी चाहिए। दूसरे राज्यों में कानूनी रूप से बेची गई शराब को तीसरे पक्ष के तस्कर बिहार लाते हैं। इसमें कंपनियों की कोई भूमिका नहीं होती। मंत्री ने फैसले पर जताई आपत्ति विभाग की बैठक में शराब निर्माता कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्णय लिया गया था। विभाग की सहमति से ही 10 कंपनियों को नोटिस जारी किया गया था। सचिव ने नोटिस वापस लेने का निर्णय लिया है, जो गलत है। - मदन सहनी, मंत्री, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग शराब कंपनियों का संघ सचिव से मिलने आया था पिछले 10 साल में पहली बार विदेशी शराब निर्माता कंपनियों के एसोसिएशन ने विभाग के सामने अपना पक्ष रखा। इसके बाद 14 अक्टूबर को होने वाली समीक्षा बैठक में सचिव ने कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई से इनकार कर दिया। जबकि, बिहार में 5 अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है।
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