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मंदिर में परिक्रमा करने के सही नियम: जानिए किस देवी-देवता की कितनी प्रदक्षिणा करना माना जाता है बेहद शुभ

📰 Ni News India 🕐 1 min read 📅 August 25, 2026 👁 5 views
मंदिर में परिक्रमा करने के सही नियम: जानिए किस देवी-देवता की कितनी प्रदक्षिणा करना माना जाता है बेहद शुभ
सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में मंदिर जाना, पूजा-पाठ करना और दर्शन के पश्चात भगवान की परिक्रमा करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बिना परिक्रमा के पूजा अधूरी मानी जाती है। मंदिर में देवी-देवताओं की परिक्रमा करने से न केवल पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है, बल्कि मानसिक शांति और ईश्वर का आशीर्वाद भी मिलता है। हालांकि, शास्त्रों और ज्योतिषीय नियमों के अनुसार, हर देवी-देवता के लिए परिक्रमा करने की संख्या अलग-अलग निर्धारित की गई है। यदि आप भी मंदिर जाते हैं, तो आपको यह जरूर पता होना चाहिए कि किस देवता की कितनी परिक्रमा लगाना शुभ माना जाता है। किस देवी-देवता की कितनी प्रदक्षिणा लगानी चाहिए? मंदिरों में अलग-अलग देवी-देवताओं की पूजा के साथ उनकी परिक्रमा के विशेष नियम बनाए गए हैं। आइए जानते हैं कि किस भगवान की कितनी प्रदक्षिणा लगानी चाहिए: गणेश जी: प्रथम पूज्य भगवान गणेश की पूजा के बाद हमेशा 3 बार परिक्रमा करना शुभ माना जाता है। भगवान शिव और माता पार्वती: शिव परिवार की परिक्रमा करते समय हमेशा 3 बार प्रदक्षिणा करनी चाहिए। हालांकि, शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती, बल्कि हमेशा आधी (सोमसूत्र तक) परिक्रमा ही पूरी की जाती है। भगवान विष्णु: जगत के पालनहार भगवान विष्णु या उनके अवतारों के मंदिर में हमेशा 4 बार परिक्रमा करनी चाहिए। संकटमोचन हनुमान जी: हनुमान जी के दर्शन के बाद 3 बार परिक्रमा लगाना फलदायी होता है। न्याय के देवता शनि देव: शनि देव की पूजा के बाद उनकी 7 बार परिक्रमा करने का विधान है। माता दुर्गा: शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा और अन्य देवियों की हमेशा 4 बार परिक्रमा करनी चाहिए। पवित्र वृक्ष (पीपल और बरगद): पीपल या बरगद के पेड़ की पूजा के दौरान 7 बार सूत या कलावा लपेटते हुए परिक्रमा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। परिक्रमा करते समय किन मुख्य बातों का रखना चाहिए ध्यान? परिक्रमा का पूरा लाभ प्राप्त करने के लिए कुछ जरूरी नियमों का पालन करना बहुत आवश्यक है। परिक्रमा हमेशा घड़ी की सुई की दिशा में (यानी क्लॉकवाइज) ही करनी चाहिए। आप जिस स्थान से परिक्रमा की शुरुआत करते हैं, एक चक्कर पूरा होने पर वहीं आकर वह चक्र समाप्त होता है। कभी भी मंदिर में उल्टी (एंटी-क्लॉकवाइज) परिक्रमा नहीं करनी चाहिए। धार्मिक शास्त्रों के नियमों का सही ढंग से पालन करने से ही पूजा का पूर्ण फल और देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।
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