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न्यायिक आयोग की टीम के सामने अफसरों के हाथ-पैर फूले:मेरठ में 70 मिनट की वार्ता और निरीक्षण में घेरा बनाकर लोगों को रखा दूर
मेरठ में अवैध निर्माण और कॉलोनियों की जांच करने पहुंची न्यायिक आयोग की टीम के चारों ओर अफसरों और पुलिस का घेरा रहा। सर्किट हाउस से उल्देपुर तक कमिश्नर, डीएम और एमडीए के अधिकारी टीम के साथ रहे,वहीं मीडिया को वीडियो बनाने से रोकने की कोशिश की गई। उल्देपुर में बिल्डरों से मकान खरीदकर फंसे लोग अपनी शिकायत लेकर आयोग के सामने पहुंचना चाहते थे। लेकिन पुलिस ने उन्हें दूर रोक दिया, जिससे पीड़ितों को अपनी बात रखने और आयोग के सदस्यों से मिलने का मौका नहीं मिला। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित सात सदस्यीय न्यायिक आयोग ने सर्किट हाउस में अधिकारियों के साथ करीब 45 मिनट बैठक की। इसके बाद टीम ने उल्देपुर में लगभग 25 मिनट तक निरीक्षण किया और अवैध निर्माण व कॉलोनियों से जुड़े मामलों की स्थिति देखी। अफसरों के घेरे में रही आयोग की टीम सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय न्यायिक आयोग गुरुवार को मेरठ पहुंचा। आयोग को जिले में अवैध निर्माण और अवैध कॉलोनियों से जुड़े मामलों की जांच करनी है। टीम ने सर्किट हाउस में अधिकारियों के साथ करीब 45 मिनट तक बातचीत की। इसके बाद आयोग उल्देपुर पहुंचा, जहां करीब 25 मिनट तक निरीक्षण किया। इस दौरान कमिश्नर, डीएम, एमडीए वीसी और सचिव समेत कई अधिकारी आयोग के सदस्यों के आसपास मौजूद रहे। उल्देपुर में पुलिसकर्मियों ने घेरा बना रखा था। स्थानीय लोग और इस मामले से जुड़े पीड़ित आयोग तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें दूर ही रोक दिया गया। सर्किट हाउस से उल्देपुर तक मीडिया को रोका आयोग की टीम जब सर्किट हाउस से बाहर निकली तो मीडिया को वीडियो बनाने से रोकने की कोशिश की गई। उल्देपुर में भी कवरेज के दौरान पत्रकारों को रोका गया। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने मीडिया को वीडियो बनाने से रोकने के निर्देश दिए। इस दौरान डीएम और मेरठ कमिश्नर भी मीडिया को वीडियो बनाने से मना करते नजर आए। अवैध कॉलोनियों को लेकर स्थानीय लोग लंबे समय से अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते रहे हैं। उनका आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी संख्या में अवैध कॉलोनियां विकसित नहीं हो सकती थीं। ऐसे में आयोग के दौरे के दौरान पीड़ितों को उससे दूर रखने और मीडिया की कवरेज रोकने की कोशिश ने पूरे निरीक्षण को लेकर सवाल खड़े किए। पीड़ितों को नहीं मिला पक्ष रखने का मौका न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया के उल्देपुर पहुंचने की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग और प्रकरण से जुड़े पीड़ित मौके पर एकत्र हो गए। उन्हें उम्मीद थी कि आयोग के सामने अपनी समस्याएं रख सकेंगे और बिल्डरों से मकान खरीदने के बाद सामने आई परेशानियों के बारे में बता पाएंगे। हालांकि, प्रशासन ने ऐसी व्यवस्था बनाए रखी कि लोग आयोग के सदस्यों के करीब नहीं पहुंच सके। पुलिसकर्मी लगातार लोगों को पीछे रखते रहे। इस दौरान आयोग के सदस्यों और पीड़ितों के बीच बातचीत नहीं हो सकी। लोगों को अपनी शिकायतें सीधे आयोग के सामने रखने का मौका नहीं मिला। ऐसे में निरीक्षण के दौरान प्रभावित लोगों का पक्ष आयोग तक पहुंच पाया या नहीं, यह स्पष्ट नहीं हो सका। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बना है आयोग सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में अवैध निर्माण और अवैध कॉलोनियों से जुड़े मामले का संज्ञान लेते हुए 21 सितंबर 2026 को न्यायिक आयोग के गठन का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में सात सदस्यीय आयोग बनाया गया है। आयोग को जिले में अवैध निर्माणों और कॉलोनियों की स्थिति की जांच करनी है। उल्देपुर में अवैध कॉलोनियों की स्थिति देखी आयोग के निरीक्षण का प्रमुख केंद्र उल्देपुर क्षेत्र रहा। यहां पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में अवैध कॉलोनियां विकसित होने के मामले सामने आए हैं। स्थानीय स्तर पर इन कॉलोनियों में मकान खरीदने वाले लोग अपनी समस्याएं उठाते रहे हैं। आयोग ने मौके पर पहुंचकर क्षेत्र की स्थिति का जायजा लिया और निरीक्षण से जुड़े बिंदुओं को नोट किया। अब आयोग की जांच में अवैध निर्माणों, कॉलोनियों के विकास और उनसे जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। जांच में संबंधित विभागों की भूमिका और अवैध कॉलोनियों के विकास से जुड़े तथ्यों की अहमियत रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हो रही इस जांच से उन लोगों को भी उम्मीद है, जिन्होंने इन कॉलोनियों में मकान खरीदे हैं और अब अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं।
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