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प्रसूता या बच्चे की मौत हुई तो मैदानी अमला जिम्मेदार:बैतूल कलेक्टर ने दिए कार्रवाई के निर्देश, वेतन रोकने तक की चेतावनी
बैतूल में मातृ-शिशु मृत्यु के मामलों को लेकर कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने स्वास्थ्य कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ब्लॉक में मां या बच्चे की एक भी मौत नहीं होनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं और बच्चों की देखभाल में लापरवाही मिलने पर संबंधित आशा कार्यकर्ता, एएनएम, सीएचओ और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी। बुधवार को घोड़ाडोंगरी जनपद पंचायत में हुई बैठक में कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग के कामकाज की समीक्षा की। उन्होंने हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं पर नजर रखने, नियमित जांच और समय पर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें समय पर दवा और जरूरी उपचार देने को भी कहा। कलेक्टर ने कहा कि गर्भवती महिला या बच्चे की स्थिति बिगड़ने से पहले स्वास्थ्य कर्मचारियों को सक्रिय होना होगा। हर स्तर पर नियमित फॉलोअप करने के निर्देश दिए गए, ताकि गंभीर स्थिति बनने से पहले इलाज मिल सके। हाईपरटेंशन-डायबिटीज के फॉलोअप में सुधार के निर्देश बैठक में हाईपरटेंशन और डायबिटीज के मरीजों की जांच और फॉलोअप में उम्मीद के मुताबिक प्रगति नहीं मिलने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने जांच, फॉलोअप और इलाज में लापरवाही नहीं करने के निर्देश दिए। काम में सुधार नहीं होने पर वेतन रोकने तक की कार्रवाई के निर्देश दिए गए। एंबुलेंस के लिए केंद्रीय कंट्रोल सिस्टम बनेगा कलेक्टर ने घोड़ाडोंगरी में एंबुलेंस व्यवस्था बेहतर करने के लिए जल्द केंद्रीय कंट्रोल सिस्टम शुरू करने को कहा। बैठक में कुपोषित बच्चों की पहचान में लापरवाही मिलने पर संबंधित सेक्टर सुपरवाइजरों को नोटिस देने के निर्देश भी दिए गए।
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