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फिराक गोरखपुरी: आईसीएस की नौकरी छोड़ी, जेल गए और फिर बने उर्दू के पहले ज्ञानपीठ विजेता
मुंबई, 27 अगस्त (आईएएनएस)। फिराक गोरखपुरी का नाम उर्दू शायरी की दुनिया में बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। उनका असली नाम रघुपति सहाय था और उन्होंने अपनी शायरी से उर्दू गजल को एक नई पहचान दी। उनकी जिंदगी सिर्फ शेर और गजलों तक सीमित नहीं थी। इसमें पढ़ाई में शानदार सफलता, सरकारी नौकरी, देश की आजादी की लड़ाई, जेल, राजनीति और साहित्य का लंबा सफर शामिल था।
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