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राहु-सूर्य का परिवार पर अटैक! जानें कब सुख-शांति छीनता है ग्रहण योग
सूर्य और राहु की युति से बनने वाला ग्रहण योग यदि जन्म कुंडली के चतुर्थ भाव में स्थित हो तो यह जीवन में विरोधाभासी परिणाम देता है. एक ओर जहां व्यक्ति को भौतिक सुख-सुविधाओं की कमी नहीं रहती है. वहीं दूसरी ओर मानसिक और पारिवारिक जीवन में अस्थिरता आती है. रिश्ते-नातों पर बुरा असर होता है.
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