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संभल का हल्लू सराय नहीं मनाता हरियाली तीज:न मेहंदी लगती है, न झूले पड़ते हैं; मान्यता- युद्ध में इसी दिन हुई थी मौत
संभल। भारत के अधिकांश हिस्सों में महिलाएं हरियाली तीज का त्योहार उत्साह और उल्लास के साथ मनाती हैं, लेकिन संभल शहर का हल्लू सराय मोहल्ला इस दिन शोक मनाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पृथ्वीराज चौहान और लाखन सिंह के बीच हुए युद्ध में लाखन सिंह की मृत्यु हरियाली तीज के दिन हुई थी। इसी घटना की स्मृति में मोहल्ले के लोग आज भी इस त्योहार को नहीं मनाते हैं। युद्ध में लाखन सिंह की हुई थी मौत शनिवार शाम 5 बजे ठाकुर ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि स्थानीय मान्यता के अनुसार संभल कभी पृथ्वीराज चौहान की राजधानी थी। उन्होंने मनोकामना तीर्थ पर स्नान करने वालों पर कर लगा दिया था। महाकाली मंदिर से मिले उपदेश के बाद आल्हा, ऊदल और मलखान कन्नौज से संभल आए और पृथ्वीराज चौहान से युद्ध किया। इसी दौरान लाखन और पदम की बाण लगने से मृत्यु होने की बात कही जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह घटना हरियाली तीज के दिन हुई थी। बेला के गौने से जुड़ी है कहानी स्थानीय मान्यता के मुताबिक, पृथ्वीराज चौहान की बेटी बेला का विवाह महोबा के राजा पदमाल के बेटे ब्रह्मा से हुआ था। बेला का गौना कराने के लिए ब्रह्मा और कन्नौज के राजा लाखन सिंह सेना के साथ संभल आए थे। गौना होने के बाद जब वे महोबा लौटने की तैयारी कर रहे थे, तभी पृथ्वीराज चौहान और राजा पदमाल के बीच युद्ध शुरू हो गया। इस दौरान पृथ्वीराज चौहान के सैनिकों ने राजकुमार ब्रह्मा की हत्या कर दी। बेला के सती होने की बात पर हुआ युद्ध कहा जाता है कि ब्रह्मा की मृत्यु के बाद बेला ने सती होने का निर्णय लिया। इसके लिए लाखन सिंह संभल के चंदन बाग से लकड़ी लेने गए थे। इसकी जानकारी होने पर पृथ्वीराज चौहान के सैनिकों और लाखन सिंह के बीच संघर्ष शुरू हो गया। स्थानीय परंपरा के अनुसार, हरियाली तीज के दिन हुए इस युद्ध में लाखन सिंह की हत्या कर दी गई। लाखन की मौत के बाद नहीं मनाई तीज स्थानीय निवासी तारावती ने बताया कि लाखन सिंह की मृत्यु की वजह से हल्लू सराय में हरियाली तीज पर कोई पकवान नहीं बनाया जाता। महिलाएं मेहंदी नहीं लगातीं और न ही झूले डाले जाते हैं। प्रीति ने बताया कि शादी के बाद जब वह हल्लू सराय आईं, तब से उन्होंने यहां तीज नहीं मनाई। वह उत्तराखंड के काशीपुर की रहने वाली हैं, जहां उनके मायके में यह त्योहार धूमधाम से मनाया जाता था। तीज पर शुभ काम से भी बचते हैं लोग स्थानीय निवासी बलिया ने बताया कि उनके परिवार में भी लाखन सिंह की मौत की घटना के बाद से हरियाली तीज नहीं मनाई जाती। इस दिन कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता और परिवार शोक की परंपरा निभाता है। मान्यता के साथ आज भी कायम परंपरा स्थानीय लोगों के अनुसार, युद्ध के बाद बचे सैनिक कन्नौज लौटने के बजाय संभल के एक सुनसान स्थान पर बस गए थे। यही क्षेत्र बाद में हल्लू सराय के नाम से जाना गया। आज भी यहां हरियाली तीज के दिन महिलाएं श्रृंगार नहीं करतीं, मेहंदी नहीं लगातीं और घरों में पकवान नहीं बनाए जाते। बच्चों और महिलाओं के झूला झूलने पर भी रोक रहती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि तीज का उत्सव मनाने पर अप्रिय घटना हो सकती है। हालांकि, ये बातें स्थानीय मान्यता और परंपरा पर आधारित हैं, जिनकी स्वतंत्र ऐतिहासिक पुष्टि नहीं हुई है।
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