politics
समूह सखियों का अयोध्या में मानदेय बढ़ाने को लेकर प्रदर्शन:धरना स्थल पर पहुंचे नगर मजिस्ट्रेट ने समूह सखियों से मांग-पत्र लेकर आश्वासन दिया
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी समूह सखियों ने मानदेय बढ़ाने सहित विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार को गांधी पार्क में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। जिले के सभी 11 ब्लॉकों से सैकड़ों की संख्या में समूह सखियां गांधी पार्क पहुंचीं और अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने सरकार से उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान किए जाने की मांग की। धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व पूजा श्रीवास्तव, अराधना सिंह और मंजू मौर्य ने किया। समूह सखियों ने राज्यपाल को संबोधित मांग-पत्र जिलाधिकारी अयोध्या को सौंपा। धरना स्थल पर मौजूद नगर मजिस्ट्रेट ने समूह सखियों से मांग-पत्र प्राप्त किया। समूह सखियों ने बताया कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों के बीच लगातार कार्य करती हैं। स्वयं सहायता समूहों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने, समूहों की बैठकों के आयोजन में सहयोग करने, समूह की गतिविधियों को आगे बढ़ाने तथा ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके बावजूद उनके कार्य और जिम्मेदारियों की तुलना में वर्तमान मानदेय काफी कम है। समूह सखियों का कहना है कि कम मानदेय के कारण परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि उनकी जिम्मेदारियों और कार्यभार को देखते हुए मानदेय में उचित वृद्धि की जाए तथा इसका भुगतान नियमित रूप से सीधे उनके बैंक खातों में किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने समूह सखियों के लिए पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने, स्वास्थ्य बीमा कराने, कार्य के लिए आवश्यक टैबलेट अथवा अन्य डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराने की भी मांग की। इसके अलावा समूह सखियों की पहचान के लिए आईडी कार्ड और निर्धारित ड्रेस उपलब्ध कराने की मांग रखी गई। समूह सखियों ने कहा कि वे ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र महिलाओं तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसलिए उनकी समस्याओं और मांगों पर सरकार को गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। धरना-प्रदर्शन के दौरान समूह सखियों ने अपनी सभी मांगों को पूरा करने की मांग की और कहा कि जब तक उनकी समस्याओं का उचित समाधान नहीं होता, तब तक वे अपनी आवाज उठाती रहेंगी।
Read full article on Bhaskar