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सपा सांसद बर्क ने यूसीसी दिया बयान:बोले- कानून बनाने से पहले संविधान और मौलिक अधिकारों का ध्यान रखें, सभी पक्षों से चर्चा जरूरी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 तक 21 एनडीए शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के बयान के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। सम्भल से सपा सांसद जिया उर रहमान बर्क ने यूसीसी को लेकर सरकार को जल्दबाजी से बचने की सलाह दी है। उन्होंने सोमवार शाम 6 बजे दीपा सराय स्थित अपने आवास से यह बयान जारी किया। सपा सांसद बर्क ने कहा कि कोई भी कानून बनाने से पहले संविधान और नागरिकों के मौलिक अधिकारों का ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने बताया कि संविधान हर नागरिक को अपने धर्म और मजहब की आजादी देता है। ऐसे में किसी भी कानून से इन अधिकारों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। जिया उर रहमान बर्क ने कहा कि अगर यूसीसी को लेकर किसी वर्ग को यह आशंका है कि उसके अधिकार प्रभावित हो सकते हैं, तो सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सभी जिम्मेदार लोगों और संबंधित पक्षों के साथ बैठकर बातचीत करे। सहमति से ही कोई बीच का रास्ता निकालना चाहिए। सांसद ने कहा कि ऐसा कानून बनना चाहिए, जिससे किसी भी नागरिक के मौलिक अधिकारों का हनन न हो। साथ ही, किसी की मजहबी आजादी पर भी असर न पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि कानून बनाते समय देश की एकता, सामाजिक सौहार्द और विकास का भी ध्यान रखना चाहिए। इससे देश की तरक्की में कोई रुकावट नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि मुसलमान हमेशा देश की तरक्की में योगदान देता रहा है और आगे भी देश के लिए खड़ा रहेगा। सांसद ने साफ किया कि उनका विरोध देशहित में कानून बनाने से नहीं है। बल्कि, यूसीसी को जल्दबाजी में लागू करने के तरीके और उसमें मौजूद कमियों से है। उन्होंने सरकार से अपील की कि यूसीसी जैसे संवेदनशील विषय पर सभी पक्षों को विश्वास में लेकर व्यापक चर्चा की जाए। उनका मानना है कि किसी भी कानून की सफलता तभी संभव है, जब उसमें संविधान के मूल्यों के साथ सभी नागरिकों के अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता का भी सम्मान हो।
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