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सिरसी में चेहल्लुम की मजलिस, मौलाना कल्बे जव्वाद ने किया:अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ा, हजरत अली के इल्म पर डाली रोशनी
संभल कस्बा सिरसी के इमामबाड़ा कला गर्बी में बुधवार को मौलाना हुसैन रजा साहब के चेहल्लुम के मौके पर मजलिस का आयोजन किया गया। इसमें देश की मशहूर धार्मिक शख्सियत मौलाना कल्बे जव्वाद नकवी लखनवी ने शिरकत की और मजलिस को संबोधित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। हजरत अली के इल्म और बुद्धिमत्ता का किया जिक्र मजलिस में मौलाना कल्बे जव्वाद नकवी ने हजरत अली अलैहिस्सलाम की हदीसों, उनके इल्म और सूझबूझ पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने हजरत अली अलैहिस्सलाम से जुड़ा एक मशहूर किस्सा भी सुनाया। मौलाना ने बताया कि एक मौके पर लोगों ने हजरत अली अलैहिस्सलाम से सवाल किया कि कौन सा जानवर अंडे देता है और कौन सा बच्चे। उनके अनुसार, यह सवाल उस समय किया गया था, जब लोग हजरत अली अलैहिस्सलाम को नमाज के पहले वक्त से रोकने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने बताया कि हजरत अली अलैहिस्सलाम ने सवाल का जवाब बेहद सरल तरीके से दिया। उन्होंने कहा कि जिन जानवरों के कान बाहर होते हैं, वे बच्चे देते हैं और जिनके कान अंदर होते हैं, वे अंडे देते हैं। मौलाना ने इस प्रसंग के माध्यम से हजरत अली अलैहिस्सलाम के इल्म और बुद्धिमत्ता को सामने रखा। अमन और निर्दोष लोगों की सलामती के लिए दुआ मजलिस के दौरान अकीदतमंदों ने धार्मिक बातें ध्यानपूर्वक सुनीं। चेहल्लुम के मौके पर इमामबाड़े में विशेष इंतजाम किए गए थे। मजलिस के बाद मरहूम के लिए दुआ की गई। कार्यक्रम के अंत में मौलाना कल्बे जव्वाद नकवी ने दुआ कराई। उन्होंने ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष में ईरान की कामयाबी के लिए दुआ मांगी। साथ ही संघर्ष में निर्दोष बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की जान जाने पर दुख जताते हुए आम नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्र में शांति की कामना की। उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों की हत्या पूरी इंसानियत के लिए बेहद दुखद है। उन्होंने युद्ध की स्थिति समाप्त होने और आम लोगों की सलामती के लिए भी दुआ की।
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