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संस्कृत विश्वविद्यालय में छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस मनाया:कुलपति बोले- सांस्कृतिक विविधता ही राष्ट्रीय एकता की ताकत, लोकगीतों से दिखाई संस्कृति की झलक
वाराणसी के सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में रविवार को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित किया गया। योगसाधना केंद्र में हुए कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। विद्यार्थियों ने लोकगीतों, भाषणों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए छत्तीसगढ़ की पहचान को सामने रखा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विविधता ही राष्ट्रीय एकता की सबसे बड़ी ताकत है। देश के प्रत्येक राज्य की भाषा, परंपरा और संस्कृति का सम्मान करना जरूरी है। लघु फिल्म से समझी छत्तीसगढ़ की संस्कृति कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, सामाजिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताओं पर आधारित लघु फिल्म दिखाई गई। इसके जरिए विद्यार्थियों को राज्य की जनजातीय संस्कृति, लोकजीवन और विकास यात्रा से परिचित कराया गया। इसके बाद विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ के लोकगीतों और पारंपरिक धुनों पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। कुलपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ का गठन वहां की विशिष्ट जनजातीय संस्कृति, लोककलाओं और परंपराओं को पहचान देने का भी प्रतीक है। विभिन्न राज्यों के स्थापना दिवस समारोह विद्यार्थियों को देश की बहुआयामी सांस्कृतिक विरासत समझने का अवसर देते हैं। ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से बनेगा समृद्ध भारत कार्यक्रम के दौरान सतर्कता जागरूकता सप्ताह के तहत ‘सतर्क नागरिक, सुरक्षित राष्ट्र’ और ‘श्रेष्ठ एवं समृद्ध भारत’ का संदेश भी दिया गया। विज्ञान विभागाध्यक्ष एवं कुलानुशासक प्रो. जितेन्द्र कुमार शाही ने कहा कि देश की समृद्धि केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि नागरिकों के नैतिक चरित्र, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से सुनिश्चित होती है। प्रत्येक नागरिक को भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता अपनाते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही को अपने व्यवहार का हिस्सा बनाना चाहिए। 15 नवंबर तक होंगे राज्यों के स्थापना दिवस कार्यक्रम विश्वविद्यालय में राज्यपाल एवं कुलाधिपति के निर्देश पर 31 अक्टूबर से 15 नवंबर तक विभिन्न राज्यों के स्थापना दिवस समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में रविवार को छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस मनाया गया। इन कार्यक्रमों के जरिए विद्यार्थियों को देश के अलग-अलग राज्यों की भाषा, संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराया जा रहा है।
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