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Sawan Shivratri 2026: सावन शिवरात्रि पर भोलेनाथ की कैसे करें पूजा,कैसे पूरी होगी हर मनोकामना, जानें शिव पूजन और जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त
Sawan Shivratri 2026: सावन का पवित्र महीना जारी है. राजस्थान और उत्तर भारत में सावन का महीना 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) के दिन समाप्त होगा. इस दिन रक्षाबंधन और श्रावण पूर्णिमा दोनों हैं. दक्षिण और पश्चिमी भारत के राज्यों में सावन 11 सितंबर, 2026 को समाप्त होगा. इस दौरान सावन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को सावन शिवरात्रि देशभर में मनाई जाएगी. ज्योतिषाचार्यों और दक्ष पुजारियों के मुताबिक, 11 अगस्त को सुबह 04:54 बजे चतुर्दशी तिथि की शुरुआत होगी. इसमें अहम बात यह है कि 12 अगस्त को देर रात 1 बजकर 52 मिनट पर चतुर्दशी तिथि समाप्त होगी. इस दिन यानी 11 जनवरी, 2026 को रात के चारों प्रहर भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है.ऐसे में श्रद्धालु यह कंफ्यूजन दूर कर लें. 11 अगस्त को ही सावन माह की शिवरात्रि देशभर में मनाई जाएगी, तभी इसका लाभ श्रद्धालुओं को मिल पाएगा. शिव मंदिरों में जल चढ़ाएंगे श्रद्धालु सावन का महीना 30 जुलाई से शुरू हुआ है और 28 अगस्त रहेगा. सावन महीना भोले यानी शिव के भक्तों के लिए अहम होता है. सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि के त्योहार के दिन भगवान शिव के मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं. इस दिन देशभर में श्रद्धालु शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं. ज्यादातर जगहों पर श्रद्धालु सावन शिवरात्रि के दिन उपवास रखते हैं. इसके साथ ही पूरी श्रद्धा से भगवान शिव की पूजा की जाती है. कुछ लोगों को चतुर्दशी तिथि को लेकर कन्फ्यूजन है. इस स्टोरी में हम बताएंगे, सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि से जुड़ी हर जरूरी बात. कब है सावन शिवरात्रि 2026? जैसा कि हम पहले ही बता चुक हैं कि सावन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को सावन शिवरात्रि मनाई जाती है. द्रिक पंचांग के अनुसार, 2026 में चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को सुबह 4 बजकर 54 मिनट पर शुरू होगी. इसके बाद 12 अगस्त को देर रात 1 बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगी. ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि सावन माह की शिवरात्रि मंगलवार (11 अगस्त, 2026) को ही मनाया जाएगा. सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त मंगलवार (11 अगस्त, 2026) को दोपहर के 3 बजकर 25 मिनट तक भद्रा लग रहा है. ऐसे में इसके बाद का समय जलाभिषेक करने के लिए शुभ रहेगा. कैसे और कब होगी पूजा-अर्चना 11 अगस्त शाम 7 बजकर 4 मिनट से रात 9 बजकर 45 मिनट तक (प्रथम प्रहर की पूजा) 11 अगस्त रात 9 बजकर 45 मिनट से रात 12 बजकर 26 मिनट तक (द्वितीय प्रहर की पूजा) 11 अगस्त रात 12 बजकर 26 मिनट से सुबह 3 बजकर 7 मिनट तक (तृतीय प्रहर की पूजा) 11 अगस्त सुबह 3 बजकर 7 मिनट से सुबह 5 बजकर 49 मिनट तक (चतुर्थ प्रहर की पूजा) क्या होगी पूजन विधि हिंदू धर्म में मान्यता है कि सावन शिवरात्र के दिन आराध्य देव भगवान शिव की पूजा करने से मन मांगी इच्छा पूर्ण होती है. पूजा कई चरणों में करें. ध्यान रखें कि इस दिन श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा और भांग भी अवश्य अर्पित करें. हो सके तो सुबह ब्रह्ममूर्त में उठकर व्रत और पूजा का संकल्प लें. अगले चरण में स्वच्छ और हो सके तो नए कपड़े पहनें. इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा एक चौकी पर स्थापित करें. शिव मंदिर जाकर शिवलिंग का जलाभिषे करें, लेकिन उससे पहले पहले घर में पूजा करें. इन बातों का भी रखें ध्यान पूजा के दौरान श्रद्धालु भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रुद्राभिषेक (भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र ऊं नमः शिवाय) करें. पुजारियों का कहना है कि शिवरात्रि पर महामृत्युंजय मंत्र का जाप या शिव चालीसा का पाठ करना भी उत्तम माना जाता है. 11 अगस्त की शाम को संध्याकल से लेकर अगले दिन सुबह तक चार प्रहर की पूजा की जा सकती है. पूजा के क्रम में श्रद्धालु रात्रि जागरण भी कर सकते हैं महादेव के मंत्रों का जाप करना शुभ रहता है. इस दिन गरीबों और ब्राह्मणों को दान करना बहुत शुभ माना जाता है. यह भी पढ़ें: Aaj Ka Love Rashifal 11 August 2026: किसका होगा ब्रेकअप, कौन करेगा पहली बार प्यार का इजहार? पढ़ें लव राशिफल
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