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*श्रद्धांजलि:विजय कुमार अग्रवाल : स्मृति में बची दो मुलाकातें*
– शैलेन्द्र चौहान कुछ लोग जीवन में बार-बार नहीं मिलते, लेकिन एक-दो मुलाकातों में ही ऐसी छाप छोड़ जाते हैं, जो वर्षों के अंतराल के बाद भी धुंधली नहीं होती। प्रो. विजय कुमार अग्रवाल से मेरी पहली मुलाकात अस्सी के दशक में इलाहाबाद के शारदा सदन प्रकाशन में हुई थी। मुलाकात बहुत लंबी नहीं थी, [...]
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