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यूपी में बाल श्रम स्कूलों के शिक्षकों ने समायोजन मांगा:बिहार की तर्ज पर सरकारी स्कूलों से जोड़ने के लिए डीएम को भेजा पत्र
बिहार सरकार की ओर से बाल श्रम स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को सरकारी स्कूलों से जोड़ने की पहल के बाद उत्तर प्रदेश में काम कर चुके बाल श्रम शिक्षकों की उम्मीद भी जाग गई है। सोमवार दोपहर करीब दो बजे शिक्षकों और कर्मचारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर आग्रह पत्र दिया और उन्हें भी सरकारी स्कूलों से अटैच या समायोजित करने की मांग की। शिक्षकों का कहना है कि बिहार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी बाल श्रम स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों को बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों से जोड़ा जाना चाहिए। इससे वर्षों से रोजगार के संकट से जूझ रहे लोगों को राहत मिल सकेगी। शिक्षकों के मुताबिक रामपुर में वर्ष 2006 में मायावती सरकार के कार्यकाल के दौरान बाल श्रम स्कूल संचालित किए जा रहे थे। इन स्कूलों का उद्देश्य बाल श्रमिक बच्चों को शिक्षा से जोड़ना था। जिले में कुल 67 बाल श्रम स्कूल संचालित थे। प्रत्येक स्कूल में पांच लोगों का स्टाफ तैनात था। इस तरह बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी इन स्कूलों के संचालन से जुड़े हुए थे। शिक्षकों के अनुसार वर्ष 2018 में बाल श्रम स्कूलों को पूरी तरह बंद कर दिया गया। इसके बाद वर्ष 2021 में इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बेसिक शिक्षा विभाग के सरकारी स्कूलों में मर्ज कर दिया गया। बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेज दिया गया, लेकिन बाल श्रम स्कूलों में सेवाएं देने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों का समायोजन नहीं किया गया। ज्ञापन देने वालों में त्रिलोचन, हेमा जोशी, अर्शी खान, इमरान, शैलेश कुमार मिश्रित, जहां, राजेश्वरी, आरिश खान, अमीन, हामिद, शबनम बेगम, तरुण, शेष कुमारी और समीना आदि शिक्षक शामिल रहे। शिक्षकों ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक बाल श्रमिक बच्चों को पढ़ाने का काम किया, लेकिन स्कूल बंद होने के बाद उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया। कई वर्षों से वे समायोजन की मांग उठा रहे हैं। बिहार सरकार की पहल के बाद उन्हें अपनी मांग पूरी होने की उम्मीद जगी है। डीएम से मांग की बिहार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी बाल श्रम स्कूलों के शिक्षकों को सरकारी स्कूलों से जोड़ने की व्यवस्था की जाए
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