top
'यूपी में एंटी स्नेक वेनम की कोई कमी नहीं':डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सर्पदंश को लेकर जारी की एडवाइजरी, अस्पतालों को किया अलर्ट
बारिश के मौसम में सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को अलर्ट किया गया है।डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) समेत सर्पदंश के इलाज में इस्तेमाल होने वाली सभी जरूरी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश दिए हैं। तराई क्षेत्र के अस्पतालों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। ब्रजेश पाठक ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी सरकारी अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम और जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सर्पदंश की स्थिति में लोग घबराएं नहीं और घरेलू उपचार में समय बर्बाद करने के बजाय तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें। उन्होंने बताया कि अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम के साथ दूसरी जरूरी दवाओं का भी पर्याप्त स्टॉक है। सर्पदंश के मरीजों के इलाज और भर्ती के लिए भी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। अस्पतालों में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। खेतों में काम करने वालों से खास सावधानी की अपील डिप्टी सीएम ने बताया कि बारिश के दौरान सांपों के बिलों में पानी भर जाता है। इससे सांप सुरक्षित जगह की तलाश में बाहर निकलते हैं। ऐसे में खेतों में काम करने वाले किसान और मजदूर विशेष सावधानी बरतें। रात में बाहर निकलते समय टॉर्च का इस्तेमाल करें और खेतों या झाड़ियों में जाते समय पैर ढकने वाले जूते पहनें। उन्होंने घर के आसपास घास-फूस और कचरा जमा नहीं होने देने की अपील की। साथ ही जूते और कपड़े पहनने से पहले उन्हें अच्छी तरह जांचने की सलाह दी। सांप दिखाई देने पर उसे पकड़ने या मारने की कोशिश न करने को कहा। गंभीर मरीजों को ही किया जाए रेफर ब्रजेश पाठक ने अस्पतालों को निर्देश दिए कि केवल गंभीर मरीजों को ही बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाए। रेफर करने से पहले मरीज को प्राथमिक उपचार दिया जाए। अस्पतालों की इमरजेंसी में सर्पदंश के मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सर्पदंश के बाद मरीज को खुद वाहन चलाकर अस्पताल न जाने दें। काटे हुए स्थान पर कसकर रस्सी या कपड़ा न बांधें। घाव पर मिट्टी, राख, जड़ी-बूटी या कोई रसायन न लगाएं। घाव पर चीरा लगाकर खून निकालने की कोशिश भी न करें। डिप्टी सीएम ने कहा कि सर्पदंश की स्थिति में समय सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए बिना देरी किए मरीज को नजदीकी अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचाएं। समय पर इलाज मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
Read full article on Bhaskar