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NSE IPO: 17 सितंबर को खुलेगा देश का सबसे बड़ा इश्यू, लॉट साइज, वैल्यूएशन और रेलिगेयर की रेटिंग

📰 Ni News India 🕐 1 min read 📅 September 15, 2026 👁 1 views
NSE IPO: 17 सितंबर को खुलेगा देश का सबसे बड़ा इश्यू, लॉट साइज, वैल्यूएशन और रेलिगेयर की रेटिंग
भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में जिस सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गम का निवेशक वर्षों से टकटकी लगाए इंतजार कर रहे थे, वह घड़ी आखिरकार आ गई है। देश के सबसे बड़े इलेक्ट्रॉनिक शेयर बाजार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) का बहुप्रतीक्षित आईपीओ बुधवार, 17 सितंबर 2026 को आम और संस्थागत निवेशकों के लिए सब्सक्रिप्शन हेतु खुलने जा रहा है, जो 21 सितंबर 2026 को बंद होगा। भारतीय शेयर बाजार में डीमैट खातों की अप्रत्याशित बाढ़, घरेलू खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और म्यूचुअल फंड उद्योग के ऐतिहासिक विस्तार के बीच आ रहे इस मेगा इश्यू को लेकर दलाल स्ट्रीट में भारी हलचल देखने को मिल रही है। हालांकि, इश्यू खुलने से ठीक पहले प्रमुख ब्रोकरेज हाउस रेलिगेयर ब्रोकिंग ने अपनी विस्तृत रिसर्च रिपोर्ट में इस आईपीओ को 'न्यूट्रल' (Neutral) रेटिंग देकर बाजार के उत्साह के बीच एक संतुलित और सतर्क नजरिया पेश किया है। आईपीओ प्राइस बैंड, 1 रुपये की फेस वैल्यू और लॉट साइज का गणित नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने अपने इक्विटी शेयरों का प्राइस बैंड 1,700 रुपये से 1,785 रुपये प्रति शेयर तय किया है। यहां खुदरा निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू यह समझना है कि कंपनी के शेयर की फेस वैल्यू महज 1 रुपये प्रति शेयर है। आम तौर पर नौसिखिए निवेशक कम फेस वैल्यू को सस्ता शेयर समझने की भूल कर बैठते हैं, जबकि हकीकत में 1,785 रुपये के अपर प्राइस बैंड पर निवेशकों को अपनी जेब ढीली करनी होगी। रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम बिड लॉट 8 शेयरों का निर्धारित किया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अपर प्राइस बैंड (1,785 रुपये) के हिसाब से एक लॉट के लिए आवेदन करने वाले खुदरा निवेशक को न्यूनतम 14,280 रुपये की पूंजी लगानी होगी, जबकि लोअर बैंड (1,700 रुपये) पर यह रकम 13,600 रुपये बैठती है। इसके अलावा कंपनी के पात्र कर्मचारियों के लिए 170 रुपये प्रति शेयर का विशेष डिस्काउंट घोषित किया गया है, जिससे कर्मचारियों को यह शेयर करीब 1,615 रुपये के प्रभावी भाव पर आवंटित हो सकता है, हालांकि यह वित्तीय रियायत सामान्य रिटेल या एचएनआई निवेशकों पर लागू नहीं होगी। 22,562 करोड़ रुपये का पूरा इश्यू 'ऑफर फॉर सेल' (OFS): कंपनी को नहीं मिलेगा एक भी नया रुपया यह सार्वजनिक निर्गम पूरी तरह से 22,562 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल (OFS) है, जिसके तहत कंपनी कोई भी नया शेयर जारी करके फ्रेश कैपिटल नहीं जुटा रही है। इसका स्पष्ट तात्पर्य यह है कि एनएसई के मौजूदा प्रमोटर्स और शुरुआती बड़े वित्तीय शेयरधारक अपने शेयरों की आंशिक बिक्री कर रहे हैं। जनता और संस्थागत निवेशकों से जुटाया जाने वाला यह पूरा फंड सीधे शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरधारकों की जेब में जाएगा, न कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के बैंक खाते में। हालांकि, अत्यधिक नकदी पैदा करने वाले और ऋण-मुक्त वित्तीय एक्सचेंजों के लिए नए पूंजी की आवश्यकता न होना स्वाभाविक माना जाता है, लेकिन निवेशकों को यह भली-भांति समझ लेना चाहिए कि इस आईपीओ के जरिए जुटाए गए पैसे का उपयोग एक्सचेंज के तकनीकी आधुनिकीकरण, डेटा सर्वर विस्तार या नए अधिग्रहणों के लिए नहीं किया जा सकेगा। अपर प्राइस बैंड के आधार पर एनएसई का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 4.42 लाख करोड़ रुपये और लोअर बैंड पर करीब 4.21 लाख करोड़ रुपये आंका गया है। इश्यू में 50 प्रतिशत कोटा योग्य संस्थागत खरीदारों (QIB), 35 प्रतिशत खुदरा निवेशकों और 15 प्रतिशत गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) के लिए आरक्षित रखा गया है। एनएसई का विशाल बिजनेस मॉडल: ट्रेडिंग, इंडेक्स लाइसेंसिंग और नेटवर्क इफेक्ट की ताकत नेशनल स्टॉक एक्सचेंज केवल इक्विटी शेयरों की खरीद-फरोख्त का मंच नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण और शक्तिशाली वित्तीय सुपर-स्ट्रक्चर है। एक्सचेंज का राजस्व मॉडल ट्रेडिंग फीस, क्लियरिंग और सेटलमेंट ऑपरेशंस, कॉरपोरेट लिस्टिंग चार्ज, रियल-टाइम मार्केट डेटा डिस्ट्रीब्यूशन और बेंचमार्क इंडेक्स लाइसेंसिंग जैसी विविध धाराओं से संचालित होता है। इसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाइयां जैसे एनएसई क्लियरिंग, एनएसई इंडिसेस, एनएसई डेटा एंड एनालिटिक्स और गिफ्ट सिटी में कार्यरत एनएसई इंटरनेशनल एक्सचेंज (NSEIX) इसके मजबूत स्तंभ हैं। वित्तीय बाजार में इसे 'नेटवर्क इफेक्ट' (Network Effect) कहा जाता है, जहां सर्वाधिक ट्रेडर और लिक्विडिटी होने के कारण हर नई लिस्ट होने वाली कंपनी और ब्रोकर मजबूरी में इसी प्लेटफॉर्म को पहली प्राथमिकता देते हैं। एक्सचेंज का यूनिक रजिस्टर्ड इन्वेस्टर बेस मार्च 2020 के 3.09 करोड़ से अप्रत्याशित छलांग लगाकर जून 2026 में 13.24 करोड़ के पार पहुंच चुका है। इसके साथ ही देश का म्यूचुअल फंड एयूएम जून 2026 में 82.22 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े को छू चुका है, जिससे पैसिव इंडेक्स फंड्स के जरिए एनएसई को भारी रॉयल्टी और ट्रांजैक्शन आय प्राप्त हो रही है। वित्तीय आंकड़े और रेलिगेयर की न्यूट्रल रेटिंग: 42.9 का पी/ई और एफवाई26 में मुनाफा घटने की चिंता व्यापारिक प्रभुत्व के बावजूद वित्तीय मोर्चे पर वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़े कुछ सुस्ती का संकेत दे रहे हैं, जिसने विश्लेषकों को सतर्क किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में एनएसई का परिचालन राजस्व (Revenue from Operations) लगभग 3 प्रतिशत घटकर 16,601.31 करोड़ रुपये रह गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में 17,140.68 करोड़ रुपये था। कंपनी का शुद्ध लाभ (PAT) भी 15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 12,187.69 करोड़ रुपये से फिसलकर 10,302.06 करोड़ रुपये पर आ गया। परिचालन एबिटा (EBITDA) 12,646.88 करोड़ से गिरकर 11,097.90 करोड़ रुपये रहा, जिससे इसका एबिटा मार्जिन 73.78 प्रतिशत से घटकर 66.85 प्रतिशत पर आ गया। हालांकि, रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 32.98 प्रतिशत और रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) 42.80 प्रतिशत के स्तर पर अभी भी बेहद मजबूत हैं। रेलिगेयर ब्रोकिंग का मानना है कि अपर बैंड पर 42.9 गुना का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) मल्टीपल काफी महंगा है और इसमें कंपनी की भविष्य की विकास संभावनाओं का बड़ा हिस्सा पहले ही शामिल हो चुका है। इसके अलावा सेबी द्वारा एफएंडओ (F&O) और ऑप्शंस ट्रेडिंग के नियमों में लगातार की जा रही सख्ती एनएसई की भविष्य की वॉल्यूम ग्रोथ और ट्रांजैक्शन रेवेन्यू पर सीधा दबाव डाल सकती है। अतः निवेशकों को केवल कंपनी के विशालकाय नाम के आधार पर अंधाधुंध पैसा लगाने के बजाय लंबी अवधि के जोखिमों और वैल्यूएशन का गंभीरता से आकलन करना चाहिए।
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