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10 साल पुरानी बस्ती, बांस-बल्ली के सहारे पहुंची बिजली:दो किलोमीटर दूर से खींचे तार, खंभे लगाने का इंतजार; कंपनी बजट मिलने पर करेगी काम
सिंगरौली के देवसर विकासखंड की ग्राम पंचायत महुआगांव के पोड़ी टोला में करीब 10 साल से बस्ती बसी है। यहां 50 घरों और सैकड़ों लोगों तक बिजली पहुंचाने के लिए दो किलोमीटर दूर से बांस-बल्ली के सहारे तार खींचे गए हैं। बस्ती में अब तक बिजली के खंभे नहीं लगाए गए हैं। ग्रामीण इसी असुरक्षित व्यवस्था के बीच रहने को मजबूर हैं। चंदा जुटाकर लगवाया ट्रांसफार्मर, खंभे अब तक नहीं लगे ग्रामीणों के मुताबिक, ट्रांसफार्मर लगवाने के लिए उन्होंने आपस में चंदा जुटाकर बिजली कंपनी के कर्मचारियों को दिया था। इसके बाद सड़क किनारे ट्रांसफार्मर लगाया गया, लेकिन बस्ती तक खंभे लगाने की मांग अब तक पूरी नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर क्षेत्रीय विधायक, सांसद, कलेक्टर और बिजली कंपनी के अधिकारियों को कई बार आवेदन दिए गए। इसके बावजूद खंभे लगाने का काम शुरू नहीं हुआ। ग्रामीण बुद्धसेन गोस्वामी ने बताया कि घरों तक बिजली पहुंचाने के लिए बांस-बल्ली पर तार लगाए गए हैं। बिजली कंपनी में शिकायत करने पर अधिकारी खंभे लगाने का आश्वासन देते हैं, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हुआ। प्रीति गोस्वामी ने बताया कि इस तरह तार लगे होने से हमेशा डर बना रहता है। बारिश में खतरा बढ़ जाता है। आंधी-तूफान में तार टूटने पर उसे ठीक कराने में भी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि पहले गांव के लोग अंधेरे में रहने को मजबूर थे। राहुल कुमार गोस्वामी ने बताया कि ग्रामीणों ने घरों तक बिजली पहुंचाने के लिए खुद तार खरीदे और अपने स्तर पर कनेक्शन किए। उनके मुताबिक, सरकार की ओर से अलग से केबल नहीं दी गई और बिजली के खंभे भी नहीं लगाए गए। कंपनी बोली- बजट मिलने पर लगाएंगे खंभे बिजली कंपनी के अधीक्षण यंत्री अजीत बघेल ने बताया कि पोड़ी टोला में खंभे नहीं होने की जानकारी उन्हें है। बजट मिलने पर गांव तक बिजली पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। कैबिनेट बैठक के बाद भी विकास अधूरा महुआगांव में फरवरी 2004 के दूसरे सप्ताह तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई थी। इसके बावजूद पोड़ी टोला के ग्रामीण आज भी बुनियादी बिजली व्यवस्था का इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि वर्षों से शिकायतें करने के बाद भी उन्हें सुरक्षित विद्युत व्यवस्था कब मिलेगी?
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