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AI वीडियो से फर्जी बैंक खाते खुलवाते थे साइबर ठग:तीन आरोपी पकड़े; साथियों से 20 लाख ऐंठने की योजना थी
अशोकनगर जिले की नईसराय पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह के तीन और सदस्यों को ग्राम रुसल्ली से गिरफ्तार किया है। गिरोह के सदस्य AI तकनीक से लोगों के फर्जी वीडियो बनाकर बैंकों में खाते खुलवाते थे और इन्हें साइबर ठगों को बेच देते थे। जांच में यह भी सामने आया कि ठगी की रकम के बंटवारे को लेकर विवाद होने पर आरोपियों ने अपने ही दो साथियों को पुलिस बनकर पकड़ने और उनसे 20 लाख रुपए वसूलने की साजिश रची थी। पुलिस ने आरोपियों के पास से दो वॉकी-टॉकी, दो मोबाइल, 24 हजार रुपए और दस्तावेज बरामद किए हैं। AI से फोटो को वीडियो में बदलकर कराते थे KYC पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य मोबाइल एप और सोशल मीडिया के जरिए लोगों के आधार कार्ड और फोटो हासिल करते थे। इसके बाद AI की मदद से फोटो को बोलते और हिलते-डुलते वीडियो में बदल देते थे। इनका इस्तेमाल बैंक की वीडियो KYC में कर फर्जी खाते खुलवाए जाते थे। खाते खुलने के बाद उनकी पासबुक, चेकबुक, एटीएम और सिम अपने पास रख लेते थे। बाद में इन खातों को साइबर ठगों को 8 से 10 हजार रुपए में बेच देते थे। इनका इस्तेमाल अलग-अलग राज्यों में ठगी की रकम के लेन-देन के लिए किया जाता था। पुलिस बनकर साथियों से मांगे 30 लाख रुपए जांच में पता चला कि ठगी की रकम के बंटवारे को लेकर गिरोह में विवाद चल रहा था। इसी के चलते आरोपियों ने आगरा निवासी राजू और रंजीत यादव को फंसाने की योजना बनाई। वे पुलिसकर्मी बनकर वॉकी-टॉकी और पुलिस का मोनो लगी कार से दोनों को पकड़ने पहुंचे। आरोपियों ने गिरफ्तारी और मारपीट का डर दिखाकर उनसे 30 लाख रुपए मांगे। बाद में 20 लाख रुपए में सौदा तय हुआ। रकम मंगाने के दौरान नईसराय पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया। अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच जारी एसपी राजीव कुमार मिश्रा के निर्देशन में थाना प्रभारी आशुतोष गुप्ता की टीम ने कार्रवाई की। पुलिस अब संदिग्ध बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और गिरोह के अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच कर रही है। मामले में अन्य आरोपियों की तलाश भी जारी है।
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